शादी के लिये बनाए अनोखे ग्रीन इन्विटेशन कार्ड, गमले में पौधे के साथ दिया निमंत्रण

शादी के लिये बनाए अनोखे ग्रीन इन्विटेशन कार्ड, गमले में पौधे के साथ दिया निमंत्रण

बैतूल/वाजिद खान

विश्व पर्यावरण दिवस पर बैतूल में एक युवक ने अनोखा संदेश दिया है। उसने अपनी शादी के इनविटेशन कार्ड को संदेश का जरिया बनाते हुए पर्यावरण संरक्षण की अनोखी मिसाल पेश की है।

महेश पुन्डे बिजली विभाग में मीटर रीडर का काम करते हैं। 15 जून को उनकी शहर के चुन्नीढाना इलाके में निकिता से शादी होने जा रही है। ऐसे में दोस्त रिश्तदारों को आमंत्रण पत्र बांटे जाने हैं। लेकिन महेश ने शादी के लिए छपने वाले निमंत्रण पत्र को नई शक्ल दे दी है। उन्होने कागज के निमंत्रण पत्र न छपवाकर उसकी जगह गमले में पौधे तैयार किये और उन गमलों में शादी का निमंत्रण चिपका दिया। इन गमलों पर निमंत्रण के संदेश में ग्रीन इंडिया, कोरोना फ्री इंडिया मूवमेंट के साथ वर महेश और निकिता की शादी में आने के लिए आमंत्रित किया गया है।

लॉकडाउन के चलते शादी में वर पक्ष से सिर्फ 25 मेहमानों के शामिल होने की अनुमति है।ऐसे मेंमहेश ने सिर्फ 25 ग्रीन कार्ड बांटे हैं। इन आमंत्रण पत्रों में मेहमानों को कहा गया है कि वे मास्क लगाकर आये और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। महेश के मुताबिक उनके इन आमंत्रण पत्रों से न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा बल्कि नई पीढ़ी को ऐसे ग्रीन कार्ड के इस्तेमाल की प्रेरणा भी मिलेगी। महेश ने बताया कि वे शादी में मास्क और हैंड सेनेटाइजर भी बांटेंगे। इधर जिन रिश्तेदारों को उन्होंने ये ग्रीन कार्ड मिले हैं वे भी इस नई पहल से खुश हैं। जया मालवीय और उनकी बेटी नीलू की मानें तो कागज के बने कार्ड या तो फेंक दिए जाते है या फिर जला दिए जाते हैं। लेकिन ये ग्रीन कार्ड वे न केवल संजोकर रख जा सकते हैं बल्कि इनकी देखभाल कर पर्यावरण संरक्षण में मदद भी मिल सकती है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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