अब बैतूल में मिले सड़क पर नोट, पुलिस ने जब्त कर शुरू की तफ्तीश

अब बैतूल में मिले सड़क पर नोट, पुलिस ने जब्त कर शुरू की तफ्तीश

बैतूल

प्रदेश में पिछले दिनों अलग अलग स्थानों पर सड़कों पर नोट फेंके जाने की घटनाएं सामने आई थीं। कोरोना संकटकाल में इस तरह की घटनाओं के इस बात से जोड़कर भी देखा जा रहा था कि ये किसी शरारती तत्व द्वारा कोरोना फैलाने की साजिश है। लेकिन इंदौर और जबलपुर में बाद में इसके पीछे अन्य वजहों का होना पाया गया।

बैतूल में भी बुधवार को ऐसी ही घटना सामने आई जब कारगिल चौक पर सुबह दस और बीस रूपये के नोट सड़क पर पाए गए। ये नोट चंद्रशेखर वार्ड निवासी राकेश पण्डागरे को उस वक्त नजर आए जब वो कारगिल चौक से रेलवे स्टेशन वाली रोड पर जा रहे थे। इन नोटों को किसी ने सड़क पर रखकर उसे पत्थर से दबा दिया था। अच्छी बात ये थी कि किसी ने भी इन नोटों को उठाया नहीं, राकेश पण्डागरे ने ये नोट देखने के बाद पुलिस को इस बात की सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सारे नोटों को जब्त किया और अब इस बात की तफ्तीश की जा रही है कि आखिर किसने इन नोटों को यहां रखा और उसका मकसद क्या था।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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