भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड में नेशनल हाईवे-719 पर सोमवार देर रात दर्दनाक सड़क हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 23 लोग घायल हुए हैं। हादसा गोहद के छीमका गांव के पास हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हाईवे पर बैठे गौवंश को बचाने की कोशिश में पिकअप सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई। हादसे ने एक बार फिर सड़कों पर बैठे बेसहारा गौवंश और उससे होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पिकअप में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के कुल 31 मजदूरों के सवार होने की बात सामने आई है। ये सभी ग्वालियर क्षेत्र में धान की रोपाई का काम पूरा कर अपने गांव लौट रहे थे। हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 23 लोग घायल हुए हैं।
गौवंश को बचाने के लिए मोड़ी पिकअप, सामने से आ गया ट्रक
गोहद चौराहा थाना प्रभारी रामनरेश यादव के मुताबिक, पिकअप की रफ्तार करीब 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा होने का अनुमान है। छीमका गांव के पास हाईवे पर गौवंश बैठा हुआ था। चालक ने उसे बचाने के लिए पिकअप मोड़ी और इसी दौरान सामने से आ रहे ट्रक से उसकी भिड़ंत हो गई।
टक्कर इतनी तेज थी कि पिकअप बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। पांच शव गोहद और तीन शव ग्वालियर में रखे जाने की जानकारी सामने आई है।
सड़क पर गौवंश और आठ मौतें, जिम्मेदारी किसकी?
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल सड़क पर बेसहारा गौवंश की मौजूदगी को लेकर है। प्रदेश के हाईवे और दूसरी व्यस्त सड़कों पर बैठे मवेशी वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं। रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब अचानक सामने आए मवेशी को बचाने की कोशिश में वाहन चालक खुद हादसे का शिकार हो जाते हैं।
भिंड के इस हादसे में पिकअप की रफ्तार सहित दुर्घटना के दूसरे पहलुओं की जांच पुलिस करेगी, लेकिन सड़क पर बैठे गौवंश की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आखिर हाईवे से बेसहारा गौवंश को हटाने, उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? आठ लोगों की जान जाने के बाद यह सवाल एक बार फिर व्यवस्था के सामने खड़ा है।






