एक महीने बाद गुरूवार से शुरू हुआ मंत्रालय में कामकाज, कहीं उत्साह तो कहीं भय का माहौल

एक महीने बाद गुरूवार से शुरू हुआ मंत्रालय में कामकाज, कहीं उत्साह तो कहीं भय का माहौल

भोपाल

गुरूवार से प्रदेश में मंत्रालय में कामकाज शुरू हो गया। सरकारी कार्यालय में काम के पहले दिन ‌सतपुड़ा विंध्याचल भवन में कर्मचारियों की भीड़ देखी गई। ‌ये भी दिखा कि अनेक सरकारी कार्यालयों में 30% उपस्थिति के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। वहीं ‌कई कार्यलय में अधिकारी और कर्मचारियों को मास्क और सैनिटाइजर भी उपलब्ध नहीं हुआ।

सीएम के निर्देश के बाद गुरूवार से मंत्रालय और सरकारी कार्यालय में कामकाज शुरू हो गया है। इस दौरान ‌सतपुड़ा भवन के मुख्य गेट पर कर्मचारियों की लंबी कतारें देखी गई। ‌ केवल कर्मचारी अधिकारियों को स्क्रीनिंग कर दफफ्तर भेजा गया। इस दौरान ‌कुछ कर्मचारियों में उत्साह देखा गया तो कुछ भयभीत भी दिखाई दिए। कोरोना संकटकाल में ऑफिस जाने पर इन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है और इसीलिये कई कर्मचारियों में संशय देखा गया।

इस बीच ‌मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के महामंत्री लक्ष्मी नारायण शर्मा ने मांग की है कि कार्यालयों में शासन द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन और कर्मचारियों की सुरक्षा की व्यवस्था की जाए। ‌उन्होंने सभी कर्मचारियों से अपील की है कि वे सुरक्षित रह कर ही कार्य करें। ‌कुछ सरकारी कार्यालयों में अब रोस्टर बन रहा है रोस्टर और उम्मीद की जा  रही है कि ‌एक-दो दिनों में व्यवस्थाएं ठीक हो जाएंगी और तब जाकर 30% उपस्थिति को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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