चर्चा का विषय बना प्रशासनिक अधिकारी का निलंबन पत्र, तेजी से हो रहा वायरल

चर्चा का विषय बना प्रशासनिक अधिकारी का निलंबन पत्र, तेजी से हो रहा वायरल

भोपाल।मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में प्रशासनिक तानाशाही के चलते एक प्रशासनिक अधिकारी ने संभागायुक्त से निवेदन किया है कि उसे निलंबित कर दिया जाए। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारी देवानंद गजभिए ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। तहसीलदार के इस पत्र से जिले में हड़कंप मच गया है। संभवत: यह प्रशासनिक जगत में पहला और अनूठा मामला है जिसमें प्रशासनिक तानाशाही के चलते एक प्रशासनिक अधिकारी ने स्वयं को निलंबित किए जाने के लिए संभागायुक्त से निवेदन किया है ।वही प्रशासनिक जगत में खुद का निलंबन के लिए पत्र चर्चा का विषय बन गया है।

दरअसल, जिला तहसीलदार देवानंद गजभिए ने संभागयुक्त को निलंबित किए जाने को लेकर पत्र लिखा है। वैसे गजभिए एक साल बाद रिटायर होने वाले है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की तानाशाही से तंग आकर उन्होंने पहले ही खुद को निलंबित किए जाने की मांग की है।प्रशासनिक अधिकारी ने खुद को बेबस बताते हुए अपने उच्च अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।खुद को निलंबित करने का आवेदन अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है । प्रशासनिक अधिकारी देवानंद गजभिए ने जिला प्रशासन द्वारा खुद को प्रताड़ित और मानसिक रूप से कष्ट देने का आरोप लगाया है। प्रताड़ना से परेशान होकर खुद के लिए सरकार से सस्पेंशन की मांग करने का पत्र चर्चा का विषय बना हुआ है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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