मध्यप्रदेश एवं राजस्थान को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली भोपाल-रामगंज मंडी नई रेल लाइन परियोजना क्षेत्रीय संपर्क, औद्योगिक विकास एवं यात्री सुविधाओं की दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है। यह परियोजना कुल 276 किलोमीटर लंबी है, जिसकी अनुमानित कुल लागत 3,035 करोड़ है।
नई रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत कुल 27 स्टेशन
इस नई रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत कुल 27 स्टेशन हैं, जिनमें रामगंज मंडी, जुल्मी, झालावाड़, झालरापाटन, जूनाखेड़ा, अमेठा, अकलेरा, पचोला, घटोली, नयागांव, भोजपुर, देवपुरा, खिलचीपुर, राजगढ़, नरसिंहपुर, ब्यावरा, पीपलखेड़ा, सोनकच्छ, नरसिंहगढ़, जमुनियागंज, कुरावर, श्यामपुर, दुराहा, जरखेड़ा, मुगलियाहाट, संत हिरदाराम नगर एवं निशातपुरा डी केबिन शामिल हैं।
04 टनल, 4 महत्वपूर्ण ब्रिज, 34 मुख्य ब्रिज, 171 अंडरपास शामिल
उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के अंतर्गत कुल 276 किलोमीटर में से निशातपुरा डी केबिन से व्यावरा तक 111 किलोमीटर का रेलखंड भोपाल के अधीन आता है, शेष रामगंजमंडी से नरसिंहपुर तक 165 किलोमीटर का खंड कोटा मंडल के अधीन आता है। इस परियोजना में कुल 4 टनल, 4 महत्वपूर्ण ब्रिज, 34 मुख्य ब्रिज एवं 171 अंडरपास शामिल है।
अब तक 169 किलोमीटर का कार्य पूर्ण
कार्य प्रगति- भोपाल-रामगंजमंडी के 276 किलोमीटर की नई रेल लाइन परियोजना में अब तक 169 किलोमीटर का कार्य पूर्ण हो चुका है। जिसमें भोपाल मंडल में निशातपुरा डी केबिन से श्यामपुर 42 किमी एवं कोटा मंडल में 127 किमी रामगंजमंडी से खिलचीपुर तक का कार्य पूर्ण हो चूका है। शेष 107 किलोमीटर में से 52 किमी का कार्य (कुरावर-श्यामपुर, सोनकच्छ-नरसिंहगढ़, ब्यावरा-सोनकच्छ, खिलचीपुर-राजगढ़) मार्च 2026 तक एवं बाकी बचा 55 किमी का कार्य वित्तीय वर्ष 2026-27 से पूर्व पूरा करने का लक्ष्य है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
1. यह परियोजना मध्यप्रदेश एवं राजस्थान दो राज्यों के 5 जिलों (कोटा, झालावाड़, राजगढ़, सीहोर एवं भोपाल) को प्रत्यक्ष रूप से जोड़ती है।
2. राजस्थान के झालावाड़ स्थित कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट के लिए कोयले की ढुलाई में यह मार्ग अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। वर्तमान में प्रयुक्त रूठियाई–ब्यावरा–झालावाड़ (215 किमी) मार्ग की तुलना में यह नया मार्ग 42 किलोमीटर कम होगा।
3. रूठियाई–कोटा–रामगंज मंडी–झालावाड़ (257 किमी) मार्ग के माध्यम से जयपुर से दक्षिण भारत की ओर चलने वाली मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों का रूट लगभग 115 किलोमीटर कम हो जाएगा, जिससे यात्रा समय में लगभग 3 घंटे की बचत होगी।
4. इस परियोजना से मध्यप्रदेश के आंतरिक जिलों—जैसे शाजापुर, राजगढ़, गुना आदि की आबादी को सीधे राज्य की राजधानी भोपाल से जोड़कर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को सशक्त आधार मिलेगा।
यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी, माल परिवहन में सुविधा
भोपाल-रामगंजमंडी नई रेल लाइन परियोजना के पूर्ण होने से यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी, माल परिवहन में सुविधा तथा क्षेत्र में रोजगार एवं औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। पश्चिम मध्य रेलवे इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समयबद्ध एवं गुणवत्ता-पूर्ण ढंग से क्रियान्वित करने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है।





