बीजेपी अब उर्दू में समझाएगी CAA और NRC की परिभाषा

बीजेपी अब उर्दू में समझाएगी CAA और NRC की परिभाषा

भोपाल। सीएए और एनआसी को लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शन को रोकने में असमर्थ रही बीजेपी ने अब नई रणनीति अपनाई है। अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को हिन्दी की जगह उर्दू में समझाया जाएगा उसके लिए बकायदा भाजपा ने उर्दू में बुकलेट भी छपवाए हैं ।भाजपा का मानना है कि इस 4 पेज की उर्दू बुकलेट अल्पसंख्यक वर्ग को ज्यादा अच्छे से समझाया जा सकेगा। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के सदस्य इस बुकलेट को लेकर मुस्लिमों के बीच जाएंगे और उन्हें इसके जरिए सीएए के बारे में समझाएंगे। प्रदेशभर में अल्पसंख्यकों को देने के लिए करीब 4 लाख बुकलेट छपवाई गई हैं।

भाजपा की रणनीति

भाजपा कार्यकर्ताओं को लोगों के घर-घर जाकर समझाने की जिम्मेदारी दी गई है।  भाजपा कार्यकर्ता अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों के बीच जाकर उन्हें सीएए की विस्तृत जानकारी देकर भ्रम को दूर करेंगे। कार्यकर्ता बुकलेट लेकर लोगों के घर-घर तक जाएंगे और उन्हें सीएए और एनआरसी को लेकर लोगों को भ्रम दूर करेंगे। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की जो योजना है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया है। उसके तहत एक कार्यकर्ता को सिर्फ एक बूथ पर 50 घरों तक पहुंचकर उनसे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के लिए समर्थन पत्र प्राप्त करने का लक्ष्य दिया गया है। मप्र के ज्यादातर जिलों में बड़ी संख्या में मुस्लिम और जैन के साथ ही ईसाई और सिख समाज के लोग रहते हैं। मप्र के भोपाल, जबलपुर, छतरपुर, इंदौर, सागर, बुरहानपुर और अन्य कई जिलों में कानून के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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