दो दिन और टल सकता है मंत्रिमंडल गठन, संख्या को लेकर फंसा पेंच

दो दिन और टल सकता है मंत्रिमंडल गठन, संख्या को लेकर फंसा पेंच

भोपाल| चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान जल्द ही अपने मंत्रिमंडल का गठन करने जा रहे हैं| शिवराज की टीम में कितने मंत्री बनेंगे इसको लेकर उलझने बढ़ती जा रही है| इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर है कि अभी दो दिन और मंत्रिमंडल गठन पर फैसला टल सकता है| 20 अप्रैल के बाद कैबिनेट का गठन होगा|

प्रदेश में कोरोना की स्तिथि को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज के साथ पार्टी अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत चाहते हैं कि मंत्रिमंडल छोटा हो| लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने ज्यादातर समर्थकों को मंत्री बनाने पर अड़े हुए हैं| हालही में सिंधिया ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की थी, जिसके बाद सिंधिया शुक्रवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्ढा से मिले और अपनी बात रखी| अब फैसला केंद्रीय नेतृत्व पर है| मंत्रिमंडल को लेकर चल रही अटकलों के बीच खबर है कि फिलहाल दो दिन और कैबिनेट का गठन पर फैसला नहीं होगा| 20 अप्रैल तक इसे टाला जा रहा है| लॉक डाउन के चलते फैसला टाला जा रहा है, केंद्र सरकार इस दिन कुछ राहतों की घोषणा कर सकती है| इसके बाद ही मंत्री शपथ लेंगे|

कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे सिंधिया समर्थकों के फिर मंत्री बनने के चांस बढ़ गए हैं| सिंधिया इसको लेकर जोर लगा रहे हैं| सिंधिया की मांग पर अमल हुआ तो तुलसी सिलावट के साथ गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसोदिया और प्रभुराम चौधरी को शामिल किया जा सकता है| इसके साथ ही कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए दिग्गज नेताओं बिसाहूलाल सिंह, एंदल सिंह कंसाना और राज्य वर्धन दत्तीगांव के साथ हरदीप सिंह डंग को लेकर भी भाजपा विचार कर सकती है|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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