भोपाल। जिन स्कूलों मे अभी कोर्स पूरा नहीं हुआ है या बच्चों की विषय को लेकर समस्यां हैं उन स्कूलों में अवकाश के दिन क्लासेस लगाई जाएंगी। दरअसल इस बार मप्र में 5वीं और 8वीं क्लास की परीक्षाएं बोर्ड की तर्ज पर होंगी। ऐसे में जिन स्कूलों में कोर्स अभी भी बचा हुआ हैं। उन्हे किसी भी हालत में एग्जाम से पहले कोर्स पूरा करना होगा। स्कूल शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव रश्मि अरूण शमी ने साफ शब्दों स्कूलों को चेतावनी दी है कि 5 वीं और 8 वीं के बच्चों पर खास ध्यान दें। पढाई के साथ-साथ हर हफ्ते टेस्ट भी लें। ताकि बच्चों की सभी डाउट क्लीयर हो जाएं और वो परीक्षा में बेहतर परफोर्मेंस कर सकें। इसके लिए छुट्टी के दिन भी कक्षाएं लगाई जाएं। ताकि बच्चे पढाई के दौरान आने वाली अपनी परेशानियों को अध्यापकों को बता पाएँ।
इसी के ही साथ इस शैक्षणिक सत्र के बचे हुए बजट को 31 मार्च से पहले खर्च करना होगा। प्रमुख सचिव ने स्कूलों को कहा है कि जो भी बजट बचा हुआ है उसे बच्चों की पढाई के दौरान होने वाली परेशानियों को दूर करने में सही तरीके से प्रयोग करें।
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Gaurav Sharma पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है।