एक महीने में बदल जाएगा कलेक्टर का नाम

एक महीने में बदल जाएगा कलेक्टर का नाम

भोपाल। मुख्यमंत्री कमलनाथ की मंशा के अनुरूप राज्य सरकार अब कलेक्टर का नाम बदलने जा रही है। दरअसल चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस तरह की मंशा प्रकट की थी कि कलेक्टर शब्द न तो जनता से आत्मीय संबंध स्थापित करता हुआ लगता है और दूसरा इससे अंग्रेजियत की बू भी आती है।

कमलनाथ की मंशा के अनुरूप सीनियर आईएएस अधिकारी आईपीसी केसरी की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया जिसमें मलय श्रीवास्तव, विशेष गढ़पाले, प्रीति मैथिल और मनीष रस्तोगी शामिल थे। इस कमेटी की सोमवार को हुई बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि कलेक्टर के नाम को लेकर किस तरह से आम जनता से संवाद स्थापित कर एक ऐसा नाम चुना जाए जो सर्वमान्य हो। समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस नाम के चुनाव के लिए जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों, राज्य प्रशासनिक सेवा जैसे संगठनों और कर्मचारी संगठनों से भी संवाद स्थापित किया जाएगा। समिति को अपनी रिपोर्ट एक माह में मुख्यमंत्री कमलनाथ को सौंपनी है। इसलिए यह उम्मीद की जा रही है कि अगले वित्तीय वर्ष में कलेक्टर का नाम कलेक्टर नहीं रहेगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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