अब लेटर से सिंधिया समर्थक विधायकों तक अपनी बात पहुंचाएंगे दिग्विजय

अब लेटर से सिंधिया समर्थक विधायकों तक अपनी बात पहुंचाएंगे दिग्विजय

भोपाल। बागी विधायकों को मनाने बेंगलुरू पहुंचे दिग्विजय सिंह उनसे संपर्क करने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। बुधवार को जब कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी जब उनको राहत नहीं दी तो दिग्विजय ने विधायकों के नाम पत्र लिखा और वो पत्र लेकर वे डीजीपी के पास पहुंचे। उन्होने डीजीपी से आग्रह किया कि वो ये पत्र विधायकों को सौंप दें लेकिन वहां भी उन्हें इनकार ही सुनने को मिला। डीजीपी ने उनका निवेदन को स्वीकार नहीं किया और अब इसके बाद दिग्विजय सिंह अब कुरियर से विधायकों तक लेटर भिजवाएंगे।

इस पत्र में उन्होने लिखा है कि कांग्रेस का इन विधायकों से लंबा संबंध रहा है और यदि किसी वरिष्ठ नेता द्वारा कोई भूल हुई है जिससे उन्हें ठेस पहुंची हो तो वो मिलकर इस बात को साफ करना चाहते हैं। दिग्विजय सिंह ने लिखा है कि वे उनसे मिलकर सारे मतभेद और मनभेद दूर करना चाहते हैं। उन्होने ये भी लिखा है कि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी इस पूरे प्रकरण से दुखी हैं और अगर विधायक उनसे न मिलना चाहते हों तो वे कोशिश करेंगे कि सोनिया गांधी से उनकी मुलाकात कराई जा सके। पत्र में विधायको से कांग्रेस न छोड़ने की अपील करते हुए उनकी हर नाराजगी दूर करने का आश्वासन दिया गया है।

इस पत्र से ज़ाहिर होता है कि कांग्रेस अब विधायकों को वापस लाने के लिये उनकी हर बात मानने को तैयार है, लेकिन सवाल वहीं अटका है कि विधायकों तक वो पहुंचेगी कैसे। फिलहाल दिग्विजय सिंह ये पत्र कुरियर से उन तक पहुंचा रहे हैं और देखना होगा कि इस खतो-किताबत का इस सियासी ड्रामे पर क्या असर पड़ता है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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