किसानों पर लॉकडाउन की दोहरी मार, जानवरों को सब्जियां खिलाने को मजबूर

किसानों पर लॉकडाउन की दोहरी मार, जानवरों को सब्जियां खिलाने को मजबूर

भोपाल

कोविड-19 के कारण पूरा देश इस समय हाहाकार कर रहा है। देश में 3 मई तक लॉकडॉउन है, ऐसे में लोगों को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कतों का पहाड़ इस समय प्रदेश के किसानों (farmers) पर टूटा है। वो ना तो फसल (crops) काट पा रहे हैं और ना ही कटी हुई फसलों को मंडियों तक पहुंचा पा रहे हैं। साथ ही इस समय सब्जियों (vegetables) के दामों में भी भारी गिरावट आई है जिस कारण किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है। यही कारण है कि सब्जियां (vegetables) खेतों में पड़ी हुई खराब हो रही हैं, ऐसे में बेचारा किसान करे तो करे क्या।

किसान (farmers) इस मुश्किल समय में अपने खेतों में लगी सब्जियां (vegetables) मवेशियों (animals) को खिलाने पर मजबूर हो गए हैं। किसान ये सब्जियां गाय, भैंस और बकरियों को खिला रहे हैं। कुछ किसान तो अपने खेत में लगी सब्जियों को गोशाला में दान कर रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ किसानों ने खेतो में लगी सब्जियों को लोगों के लिए फ्री (free) कर दिया है। किसानों का कहना है कि बाजारों में सब्जियों के सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं जिस वजह से सब्जियां (vegetables) खराब हो रही हैं। ऐसे में उनके पास कोई और विकल्प नहीं है। भूसे की कमी ना हो इसलिए वो मवेशियों (animals) को सब्जी खिला रहे हैं, पहले ही बेमौसम बारिश और ओलों ने मुसीबत बढ़ा दी थी और इस लॉकडॉउन ने तो किसानों की पूरी ही कमर तोड़ दी है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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