मध्यप्रदेश सरकार का नया आइटम “आइफा अवार्ड”- गोपाल भार्गव

मध्यप्रदेश सरकार का नया आइटम “आइफा अवार्ड”- गोपाल भार्गव

भोपाल। आइफा अवार्ड को लेकर भी अब राजनीति शुरू हो गई है। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा है कि एक तरफ राज्य सरकार खजाना खाली होने का रोना रो रही है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के ग्लैमरस आयोजनों के ज़रिये वाहवाही लूटने की कोशिश कर रही है।

सोमवार को भोपाल में सलमान खान आर जैकलीन फर्नांडीस ने मुख्यमंत्री कमलनाथ की मौजूदगी में आइफा अवार्ड्स की तारीखों की घोषणा की, जिसके बाद गोपाल भार्गव ने इसे सरकार की वादाखिलाफी का जश्न करार दे दिया। उन्होने कहा कि प्रदेश में आदिवासियों दलितों की स्थिति बिगड़ती जा रही है, सरकार युवाओं लिये रोज़गार के साधन मुहैया कराने में नाकाम साबित हो रही है, अनेक योजनाओं के हितग्राहियों को योजना के लाभ से वंचित किया जा रहा है और दूसरी तरफ आइफा अवार्ड के नाम पर जनता के पैसों से जश्न की तैयारी की जा रही है।

गोपाल भार्गव ने इस आयोजन को पूरी तरह फिज़ूलखर्ची करार देते हुए सरकार को जमकर आलोचना की। उन्होने कहा कि कांग्रेस सिने सितारों की आवभगत में लगी है और जनता परेशान है। उन्होने आइफा अवार्ड फंक्शन को फिज़ूलखर्ची करार देते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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