राज्यपाल ने स्पीकर को लिखा पत्र, किये कटाक्ष

राज्यपाल ने स्पीकर को लिखा पत्र, किये कटाक्ष

भोपाल। मध्य प्रदेश में रोज बदल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच राजनीतिक संकट को सुलझाने के लिए चिट्ठी की सियासत भी जारी है। विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने मंगलवार को राज्यपाल लालजी टंडन को चिट्ठी लिखकर विधायकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। जवाब में राज्यपाल ने स्पीकर को पत्र लिखा है। पत्र में राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष पर कटाक्ष करते हुए लिखा है कि शायद उन्हें वह पत्र गलती से भेज दी है।

राज्यपाल ने अपने पत्र में विधानसभा अध्यक्ष से ही सवाल पूछ लिए है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि जो विधायक अनुपस्थित हैं उनकी सुरक्षा के बारे में आपकी चिंता प्रशंसनीय लेकिन पत्र में आपने उनकी जानकारी प्राप्त करने के लिए क्या प्रयास किए, यह उल्लेख नहीं है। आपने छह सदस्यों के इस्तीफे स्वीकार किए, यह निष्पक्ष साहस पूर्ण और शीघ्र किया हुआ निर्णय है, लेकिन आप जानते होंगे कि किस विधिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था।
आगे अपने पत्र में राज्यपाल ने लिखा है कि आपने मुझसे कुछ प्रश्नों के उत्तर चाहे हैं, उन प्रश्नों के उत्तर में किन नियमों के तहत दूं, कृपया नियमावली मुझे भेजें। आपने विधायकों की सुरक्षा की मांग मुझसे की है, लेकिन यह कार्य कार्यपालिका का है। ऐसा लगता है आपने गलती से मुझे पत्र भेज दिया है। पत्र में आगे उन्होंने लिखा है कि तथाकथित लापता विधायकों से आपको और मुझे लगातार पत्र प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने अपने किसी भी पत्र में, जहां पर भी वे वर्तमान में हैं, अपनी ओर से कोई समस्या व्यक्त नहीं की है। उनके पत्र एवं वीडियो लगातार समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया में आ रहे हैं और अब वे सर्वोच्च न्यायालय भी पहुंच गए हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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