VIDEO: रामबाई के बयान पर भड़के गोविन्द सिंह, ठोकेंगे मानहानि का दावा

VIDEO: रामबाई के बयान पर भड़के गोविन्द सिंह, ठोकेंगे मानहानि का दावा

भोपाल।
पथरिया से बसपा विधायक रामबाई द्वारा सहकारिता मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह पर लगाए गए आरोपों के बाद सियासत गर्मा गई है। मंत्री ने विधायक के इस बयान पर पलटवार करते हुए धमकी दी है।मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है बसपा विधायक रामबाई आरोपों का खंडन करें, वर्ना मानहानि का दावा करूंगा।बता दे कि रामबाई ने सहकारिता विभाग के संविदा पर रखे गए कम्प्यूटर ऑपरेटरों को निकाले जाने के मुद्दे पर सहकारिता मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह पर आरोप लगाए है।

आज मीडिया से चर्चा करते हुए सहकारिता मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह ने कहा है कि ”पथरिया की बसपा विधायक रामबाई ने मेरे विरूद्ध जो बयान दिया है वह पूर्ण रूप से असत्य, तथ्यहीन एवं अमर्यादित है। या तो वे अपने इस बयान का खंडन करें अन्यथा मैं उनके विरूद्ध मानहानि का प्रकरण दर्ज कराऊंगा।”

दरअसल, रामबाई भोपाल में अपने निवास पर सहकारिता विभाग से बाहर किए गए संविदा कंप्यूटर ऑपरेटरों की समस्या सुन रही थी। उन्होंने ऑपरेटरों को बाहर करने पर कहा कि लहार के विधायक और सहकारिता मंत्री डॉ. गोविंद सिंह को ईश्वर ने बच्चे दिए हैं..उन्हें समझना चाहिए…समझ नहीं आ रहा…यह मंत्री कर क्या रहा है…भोपाल में बैठकर बिजनेस चला रहा है..जो देता है उसे बुला लेते हैं, जो नहीं देता, उसे बाहर कर देते हैं। मैं सीएम के पास जाती हूं, अपनी प्रॉब्लम नहीं बता पाती, आप लोगों की बताती हूं…मुझे खुद समझ में नहीं आता… वचन पत्र में जो है…और हो क्या रहा है।इसको लेकर मंत्री गोविंद सिंह ने रामबाई को चेतावनी दी है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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