गणतंत्र दिवस के अवसर पर बनाई गई मानव श्रृंखला, राष्ट्रगान के बाद किया गया संविधान की प्रस्तावना का वाचन

गणतंत्र दिवस के अवसर पर बनाई गई मानव श्रृंखला, राष्ट्रगान के बाद किया गया संविधान की प्रस्तावना का वाचन

भोपाल। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मुद्दे पर विगत 26 दिन से भोपाल के इक़बाल मैदान पर चल रहे निरंतर सत्याग्रह के दौरान आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर हजारों की संख्या में शहर के नागरिकों ने उपस्थित होकर मानव श्रृंखला आयोजित की। इस अवसर पर सत्याग्रहियों ने सर्वप्रथम समवेत रूप से राष्ट्रगान गाया और फिर भारत के संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया। राष्ट्रवाद के मुद्दे पर दिल्ली से आई मैमूना मुल्ला ने वक्तव्य प्रदान किया।

हमीदिया अस्पताल से मोती मस्जिद तक फैली मानव श्रृंखला में बड़ी संख्या में महिलाएं, छात्र और नौजवान शामिल हुए। मानव श्रृंखला के समापन के बाद सत्याग्रह स्थल पर आयोजित आमसभा को प्रदेश के विभिन्न स्थानों से आये विभिन्न तबकों के प्रतिनिधि वक्ताओं ने अपनी बात रखी। वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लाया गया नागरिकता संशोधन कानून का निशाना हिन्दू या मुसलमान नहीं बल्कि भारत का संविधान है जिसे वे बहुत पहले से खत्म करना चाहते हैं। अतः सीएए और एनआरसी के खिलाफ देश भर में जो जन आंदोलन चल रहा है वह वास्तव में इस देश के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई है। वक्ताओं ने कहा कि मोदी जी को रजिस्टर बनाने का बहुत शौक है तो देश में गरीबों और बेरोजगारों का रजिस्टर बनायें ताकि गरीबी और बेरोजगारी को खत्म किया जा सके। वक्ताओं में हमीदा बी, नंदकिशोर मेहर,अंशुल त्रिवेदी, कमरुद्दीन, आदि प्रमुख थे।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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