जीतू का हमला – जब वेंटीलेटर ख़रीदने थे तो MLA खरीदे जा रहे थे

जीतू का हमला – जब वेंटीलेटर ख़रीदने थे तो MLA खरीदे जा रहे थे

भोपाल।
कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे राऊ से कॉंग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने पीएम मोदी और शिवराज सरकार पर जमकर हमला बोला है।जीतू ने कहा है कि जब मास्क बनवाने थे तब अहमदाबाद में ग़रीबी छुपाने के लिए दीवार बनवाई जा रही थी।जब वेंटीलेटर ख़रीदने थे तो म.प्र के विधायकों को ख़रीदा जा रहा था।

जीतू ने ट्वीट कर लिखा है कि जब डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए उपकरण मुहैया कराने थे तो ताली, थाली पिटवाई जा रही थी..। अब प्रवचन दिये जा रहे हैं और सरकार की नाकामी पर बात करो तो कहते हैं कि सकंट की इस घड़ी में राजनीति ना करो..।

दूसरे ट्वीट में जीतू ने लिखा है कि जब कोरोना वायरस से बचाव के लिए रणनीति बनानी थी, तब ट्रंप की आरती उतारी जा रही थी..।जब मास्क बनवाने थे तब अहमदाबाद में ग़रीबी छुपाने के लिए दीवार बनवाई जा रही थी।जब वेंटीलेटर ख़रीदने थे तो म.प्र के विधायकों को ख़रीदा जा रहा था।

तीसरे ट्वीट में जीतू ने लिखा है कि शिवराज जी, आपने कल भाषण तो बढ़िया दिया लेकिन अपनी जान की परवाह न किए बगैर अपना कार्य कर रहे डॉक्टर व नर्सेस को जोखिम भत्ता तो दूर की बात अभी तक मार्च माह का वेतन तक नहीं मिला है..।श्रीमान आपको भाषण से फुर्सत मिल गई हो तो इनका वेतन जारी करवा दीजिए। भगवान करे इस भाषण में बोली हुई बातें आप पूरी भी करें।आपकी बातों और घोषणाओं को लेकर मध्यप्रदेश की जनता का अनुभव कभी अच्छा नहीं रहा है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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