लॉकडाउन का खुला उल्लंघन, भाजपा में शामिल होने कांग्रेस के 200 कार्यकर्ता भोपाल पहुंचे

लॉकडाउन का खुला उल्लंघन, भाजपा में शामिल होने कांग्रेस के 200 कार्यकर्ता भोपाल पहुंचे

भोपाल| कोरोना संकट (Corona Crisis) के बीच भाजपा (BJP) में सदस्यता अभियान जारी है| लॉकडाउन (Lockdown) में जहां अंतिम संस्कार, शादी, बारात के लिए संख्या निर्धारित की गई है, लोगों को घरों में रहने को कहा जा रहा है, ऐसे में भाजपा के प्रदेश कार्यालय में बीजेपी की सदस्यता लेने रायसेन (Raisen) से 200 कार्यकर्ता भोपाल (Bhopal) पहुंचे| जो कि लोकडाउन के नियमों का जहां खुला उल्लंघन का मामला है, वहीं सोशल डिस्टेंसिंग की भी धज्जियाँ उड़ाई गई|

दरअसल, शनिवार को पूर्व मंत्री प्रभूराम चौधरी के नेतृत्व में रायसेन के 200 कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भोपाल में भाजपा की सदस्यता ली| बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में सदस्यता कार्यक्रम हुआ, जिसमे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा (VD Sharma) और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj SIngh Chauhan) भी शामिल रहे| इस बैठक में लॉकडाउन का मखौल उड़ाया गया| वहीं कार्यालय के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी नहीं किया गया|

रायसेन जिला जो कि ग्रीन जोन में है और भोपाल रेड जोन में| ग्रीन जोन से रेड जोन वाले जिले में आने के लिए ऑनलाइन अनुमति लेनी होती है| रायसेन जिला प्रशासन ने भोपाल स्थित बीजेपी कार्यालय में बैठक में शामिल होने के लिए अनुमति दे दी। SDM ने मैन्युअल अनुमति जारी की| जब आम लोगों को अपने जरूरी कामों के लिए अनुमति लेने चक्कर काटने पड़ रहे हैं, ऐसे समय में रायसेन से इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं का भोपाल आना प्रशासन पर सवाल खड़े कर रहा है|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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