मध्य प्रदेश में MBBS इंटर्न डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, हमीदिया समेत कई अस्पतालों में सेवाएं प्रभावित, जानें क्या है मांग

मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इंटर्न डॉक्टर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, मरीजों को भारी परेशानी हो रही है।
Doctors Strike

जब किसी को बीमारी होती है, तो वह अस्पताल की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखता है। उसे लगता है कि वहां उसे उचित देखभाल और समय पर इलाज मिलेगा। लेकिन आजकल मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में यह उम्मीद धूमिल होती दिख रही है, और इसका सीधा असर आम मरीजों पर पड़ रहा है। आपको बता दें कि राजधानी भोपाल के प्रसिद्ध हमीदिया अस्पताल सहित पूरे मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। यह स्थिति इसलिए पैदा हुई है, क्योंकि प्रदेश के करीब 2500 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।

भोपाल के हमीदिया अस्पताल की ही बात करें, तो यहां के सभी 250 इंटर्न्स काम बंद करके प्रदर्शन कर रहे हैं। इस वजह से मरीजों की इलाज व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है, और उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में ओपीडी से लेकर वार्डों तक, हर जगह मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिन मरीजों को तत्काल इलाज की जरूरत है, उन्हें भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, और कई मामलों में तो उन्हें बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है।

क्या हैं इंटर्न डॉक्टरों की मांग?

इन हड़ताली इंटर्न डॉक्टरों की मुख्य मांग यह है कि उनका मासिक स्टाइपेंड बढ़ाया जाए। उनका कहना है कि वे दिन-रात अस्पतालों में अपनी सेवाएं देते हैं, मरीजों की देखभाल करते हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाला भत्ता बेहद कम है। इंटर्न्स की मांग है कि उनका मासिक स्टाइपेंड जो अभी 14,000 रुपये है, उसे बढ़ाकर कम से कम 30,000 रुपये प्रति माह किया जाए। यह एक जायज मांग है, खासकर जब आप उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण को देखते हैं।

डॉक्टरों ने अपनी इस मांग के समर्थन में कुछ आंकड़े भी पेश किए हैं, जिन पर गौर करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि एमबीबीएस की फीस के मामले में मध्य प्रदेश देशभर में 5वें स्थान पर है। इसका मतलब है कि यहां एमबीबीएस की पढ़ाई काफी महंगी है। वहीं, जब बात डॉक्टरों को स्टाइपेंड देने की आती है, तो हमारा राज्य 23वें स्थान पर बहुत पीछे है। यह अंतर साफ तौर पर दिखाता है कि पढ़ाई के लिए तो मोटी रकम ली जाती है, लेकिन जब डॉक्टरों को उनके काम का मेहनताना देने की बारी आती है, तो राज्य सरकार उतनी उदार नहीं दिखती। यह स्थिति वाकई चिंताजनक है और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

लिखित आश्वासन मिलने तक हड़ताल जारी रखने पर अड़े इंटर्न डॉक्टर

इंटर्न डॉक्टरों ने यह बात भी साफ कर दी है कि जब तक राज्य सरकार उनकी मांगों पर कोई लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। यह जानना जरूरी है कि इंटर्न्स के अचानक काम बंद करने से अस्पतालों में जूनियर और सीनियर डॉक्टरों पर काम का दबाव काफी बढ़ गया है। उन्हें दोगुना काम करना पड़ रहा है, जिससे उनकी अपनी सेहत और मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। मरीजों और उनके परिवारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई गंभीर मरीजों को भी पर्याप्त देखभाल मिलने में मुश्किल आ रही है। सरकार को इस गंभीर स्थिति पर जल्द से जल्द ध्यान देना चाहिए ताकि मरीजों को राहत मिल सके और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं फिर से सुचारू रूप से चल सकें। यह हम सभी के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है।

Gaurav Sharma
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