आरक्षण के फेर में अटका एमपी पीएससी का रिजल्ट

आरक्षण के फेर में अटका एमपी पीएससी का रिजल्ट

भोपाल। एमपी पीएससी प्रारंभिक परीक्षा दे चुके उम्मीदवारों के लिये अभी नतीजों का मौसम नहीं आया है। आरक्षण के मुद्दे के कराण फिलहाल इनके रिज़ल्ट पर रोक लगी हुई है। दरअसल ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला फिलहाल हाईकोर्ट में है और जब तक इसपर अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, आयोग ने रिजल्ट जारी करने से इंकार कर दिया है।

राज्यसेवा प्रारंभिक परीक्षा 12 जनवरी को हुई थी। 15 जनवरी को परीक्षा की प्रावधिक (मॉडल) उत्तर कुंजी जारी की गई थी। इसमें दिए प्रश्न-उत्तरों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए 23 जनवरी तक का समय जारी किया गया था और इन आपत्तियों के निराकरण के बाद आयोग  को को फाइनल आंसरशीट जारी करनी थी जिसके आधार पर रिजल्ट तैयार किया जाता। लेकिन कुछ उम्मीदवारों ने आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई है और माना जा रहा है कि 27 फरवरी को इस याचिका पर अंतिम सुनवाई होगी। हाईकोर्ट द्वारा इस मामले पर निर्णय सुनाए जाने के बाद ही आयोग प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी करेगा।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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