SC के नोटिस पर नरोत्तम मिश्रा का बड़ा बयान, सिंधिया के विरोध पर कांग्रेस को घेरा

SC के नोटिस पर नरोत्तम मिश्रा का बड़ा बयान, सिंधिया के विरोध पर कांग्रेस को घेरा

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) द्वारा विधानसभा अध्यक्ष (speaker of the Assembly) को नोटिस दिए जाने पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा (Home Minister Narottam Mishra) का बड़ा बयान सामने आया है।मिश्रा का कहना है कि विधायको के ज्ञान पर प्रश्न नही है, न ही में कोर्ट की अवमानना कर रहा हूं, मैं स्पष्ट कर दूं कि योग्यता का प्रश्न तब होता है, जब सम्मानित सदस्य, सदस्य होता है। मंत्री बनने की बात है तो वो सदस्य रहते मंत्री नही बने। वो इस्तीफा देने के बाद बने है, सच तो यह है कि न्यायलय का समय जाया किया जा रहा है ।

सिंधिया के विरोध पर कांग्रेस को घेरा

इंदौर में राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के विरोध पर डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ता जो है न जाने जैसे तैसे जीत कर 2 से 4 सीट बीजेपी से ज्यादा ले आए, कांग्रेस के नेता तो भोपाल में बैठे थे। खड़ी फसल कांग्रेस के कार्यकर्ताओ ने दी थी, जिसे खत्म कर दी इसके लिए दिग्विजय सिंह और कमलनाथ का विरोध होना था ।दंडोतिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया का विरोध कांग्रेस की ध्यान भटकाने की साजिश है ।

दो मुंह की राजनीति करती कांग्रेस

पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) के सीएम शिवराज (CM Shivraj Singh Chouhaan ) को बासमती के जीआई टैग को लेकर धरने पर बैठने की बात पर कहा कि कांग्रेस की विचित्र स्तिथि है एक पूर्व मुख्यमंत्री कहते है कि बासमती का दर्जा नही मिले, एक पूर्व मुख्यमंत्री कहते है कि सीएम शिवराज हमारे साथ धरने पर बैठे। ये लोग दो मुँह की राजनीति करते है , किसान और जनता को बेवकूफ समझते है, इसलिए कांग्रेस अब सम्माप्ति की ओर है

आगामी उपचुनाव का बजट बढ़ाया

प्रदेश की शिवराज सरकार ने आगामी 27 सीटों पर होने वाले उपचुनावों (Byelection) के बजट में बढोत्तरी की है, सरकार ने बजट 3 हजार करोड़ का किया है ,इस पर नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि यह सबको पता है कि उनके क्षेत्र की उपेक्षा की गई है, किसी प्रकार से विकास हुआ नही, इसलिए यह प्रावधान किया गया है।

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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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