भोपाल>। राजधानी के मिंटो हॉल में आयोजित आइफा अवार्ड की घोषणा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ के फोटो सेशन को लेकर प्रदेश के कद्दावर भाजपा नेता और विधायक नरोत्तम मिश्रा ने तंज कसा है। नरोत्तम ने कहा है कि कमलनाथ जी आपका हाथ तो गरीब किसानों के सिर पर होना चाहिए था, आपका हाथ बेरोजगार नौजवानों के सिर पर होना चाहिए था और आपका हाथ अतिथि विद्वानों के सिर पर होना चाहिए था। आखिरकार ऐसी क्या जल्दबाजी है जो आइफा अवार्ड करने के लिए सरकार बिल्कुल हड़बड़ी में है। ऐसे समय में जब खजाना खाली करने की बात की जाती है,आइफा अवार्ड पर करोड़ों रुपए खर्च करना किसी भी तरह से समझ से परे है।
नरोत्तम मिश्रा ने आगे कहा कि सरकार को किसानों के साथ कर्ज माफी के वादे को पूरी शिद्दत के साथ निभाना चाहिए और उसके साथ साथ बेरोजगारों के लिए भी जो बेरोजगारी भत्ता देने की बात की गई थी उस पर भी अमल होना चाहिए। इसके साथ ही वचन पत्र में कई ऐसी बातें हैं जो पूरी करने के लिए भारी बजट की जरूरत है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता बजाए इन सबके आइफा अवार्ड में ज्यादा लगती है। नरोत्तम ने यह सवाल भी किया कि आखिरकार मुख्यमंत्री बताएं कि आइफा अवार्ड के माध्यम से मध्यप्रदेश को क्या लाभ होने वाला है।
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Gaurav Sharma पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है।