हेलमेट नहीं पहनने वालों से निबंध लिखवा रही पुलिस, राजधानी में चल रही अनोखी मुहीम

हेलमेट नहीं पहनने वालों से निबंध लिखवा रही पुलिस, राजधानी में चल रही अनोखी मुहीम

भोपाल| दो पहिया वाहन चालकों को हेलमेट लगाने के लिए जाकरूक करने भोपाल पुलिस अनोखी मुहीम चला रही है| बार बार जुर्माना करने के बाद भी नहीं सुधरने वाले ऐसे लोगों को सबक सिखाने भोपाल की ट्रैफिक पुलिस ने अनोखा रास्ता खोजा है| बिना हेलमेट गाड़ी चला रहे वाहन चालकों को ट्रैफिक पुलिस 100 शब्दों का निबंध लिखवा रही है| इतना ही नहीं जो सबसे अच्छा लेख लिखेगा उसे दिलचस्प इनाम दिया जा रहा है|

यातायात पुलिस ने 31वें सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत लोगों को जागरूक करने के लिए “दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट क्यों नहीं पहना था?” विषय पर 100 शब्दों का निबंध लिखवाया। यातायात पुलिस के अनुसार, 2 दिन बाद टॉप 3 विजेताओं को पुरस्कार स्वरूप हेलमेट दिया जाएगा। सड़क सुरक्षा सप्ताह का समापन 17 जनवरी को होगा। 11 जनवरी से शुरू हुआ 31वां सड़क सुरक्षा सप्ताह 17 जनवरी तक चलेगा|इस दौरान भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर मुस्तैद ट्रैफिक पुलिस ने यहां से गुजरने वाले सभी दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को रोक लिया जिन्होंने हेलमेट नहीं पहना था और सीट बेल्ट नहीं लगा रखा था|

पुलिस ने बाकायदा टेंट की व्यवस्था की है और यहां पहले से टेबल, कुर्सी, कागज-कलम की व्यवस्था की गई| वाहन चालकों को यहां बिठाकर उनसे निबंध लिखवाया गया| इस दौरान बिना हेलमेट पकड़ाए लोगों ने हेलमेट नहीं पहनने के अजीबो गरीब बहाने भी बताये|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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