भोपाल का यह समाज घर जाकर नहीं बल्कि फोन पर भेजेगा आयोजन का निमंत्रण

भोपाल का यह समाज घर जाकर नहीं बल्कि फोन पर भेजेगा आयोजन का निमंत्रण

भोपाल। शादी की निमंत्रण पत्रिका पर आज लोग हजारो रूपए खर्च कर रहे हैं। इसमें ना केवल पैसों की बर्बादी है बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। शहर को इसी प्रदूषण से बचाने के लिए सिंधी समाज ने तय किया है कि आयोजन कोई भी हो लेकिन किसी भी कार्यक्रम के लिए कार्ड नही छपवाए जाएंगे बल्कि ई-निमंत्रण का उपयोग किया जाएगा।

अगर देखा जाए तो कार्यक्रमों में कार्ड का काम सबसे महत्वपूर्ण होता है। घर के सदस्य कार्ड छपवाने से लेकर बांटने तक इसी में उलझे रहते हैं और जब वो कार्ड परिचितों तक पहुंचता है परिचित उसे एक बार देख रद्दी में फेंक देते हैं। इससे पैसे, समय, श्रम सब वेस्ट चला गया। इसलिए सिंधी पंचायत ने अब इस बात को पूरी तरह से अपना लिया है कि वो अब ई-निमत्रंण का ही प्रयोग करेंगे। साथ ही लोग यहां के लोग यह चाहते हैं कि उनका यह फैसला पूरे देश में लागू हो। सिंधी समाज के लोगों ने बयाता कि ई-निमंत्रण के लिए उन्होने दो तरीके अपनाए हैं। इन दो तरीकों में ई-मेल और वॉट्सअप शामिल हैं। खास बात यह है कि इन दोनो ही माध्यम से कार्ड भेजने में ना तो पैसा लगेगा ना समय की बर्बाद होगा और ना ही पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचेगा। बता दें कि वॉट्सअप का प्रयोग इसलिए चुना गया है कि यह आज के समय में हर व्यक्ति प्रयोग करता है और ई-मेल उन लोगों के लिए हैं जो व्हाट्सप प्रयोग नही करते।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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