प्रदेश की जेलों में बंद कैदी ऐसे दे रहे कोरोना को चुनौती

प्रदेश की जेलों में बंद कैदी ऐसे दे रहे कोरोना को चुनौती

भोपाल।
एक तरह जहां महामारी के इस आपातकाल में घर पर लोगों को रोके रखने के लिए सोशल मीडिया पर साडी चैलेंज और स्माइल चैलेंज जारी था वहीँ मध्यप्रदेश कि जेलों में बंद महिला और पुरुष बंदियों के साथ अधिकारियों के बीच सूती कपड़े के मास्क बनाये जाने कि चुनौतियां जारी थी | जब सारा देश चिकित्सकों और covid 19 के केयर गिवर्स के लिए तालियाँ बजा रहा था तो जेल अधिकारियों ने सिलाई कारखानों में दिन रात जुटे रहने वाले कर्मचारियों और कैदियों के लिए भी तालियाँ बजाई |

आवागमन न होने और सुरक्षा कि दृष्टि से मुलाकात बंद हो जाने से सभी जेलों में दूरभाष सुविधा का विस्तार एक सप्ताह में ही कर दिया गया | अतिभीड की समस्या के समाधान के लिए उच्च स्तरीय समिति के निर्देशों से अभी तक 5500 से अधिक कैदियों को रिहा किया गया |

जेल कि सलाखों में बंद कैदियों ने यह भी महसूस किया कि आज़ाद घूमने वालों को भी समय आने पर अपने घरों में लगातार क़ैद रहना है, परिस्थितियों को स्वीकार करना है ताकि वो भी इस महामारी की चपेट में आने से बच सकें | किसी को दुःख पहुँचाने वाले हाथों ने जब जीवन दान देने वाले मास्क, साबुन, फिनाइल, सनिटाइज़र का निर्माण किया तो उनका प्रायश्चित भी सार्थक हुआ |

कम समय में अथक परिश्रम करके जो संतोष मिला उसे केवल वही अनुभव कर पा रहे हैं | जबकि सारी दुकानें बंद है तब भी नये उपकरणों का प्रयोग जारी है किसी ने sanitizer spray door बनाया तो किन्ही जेलों में हैण्ड वाशिंग के नए वाशबेसन बनाये गए | जेल भूमि से ताज़ी सब्जियों और जेल गौशालाओं से दूध की आपूर्ति भी खेती और गौशाला समिति के कैदियों ने जारी रखी | चर्चाओं में अंतिम पायदान में आने और उपेक्षित रहने के बाद भी वैश्विक “लॉकडाउन” के समय “लॉकअप” में बंद रहने वालों ने हमें भी धैर्य, अनुशासन और आशा बनाये रखने की प्रेरणा दी है | ईश्वर से यही प्रार्थना है कि सभी की गलतियों को क्षमा करते हुए फिर उत्साह से भर दें …

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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