निर्भया केस में देरी पर शिवराज नाराज, बोले-इसीलिए एनकाउंटर पर खुशी मनाती है जनता

निर्भया केस में देरी पर शिवराज नाराज, बोले-इसीलिए एनकाउंटर पर खुशी मनाती है जनता

भोपाल।
निर्भया केस में बार बार हो रही देरी को लेकर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान सामने आया है।शिवराज ने कहा है कि निर्भया के हत्यारे नरपिशाचों को किसी भी तरह की कोई भी छूट न देकर जल्द से जल्द फाँसी पर लटका देना चाहिए।वही उन्होंने ऐसे अपराधों के लिए कानून में बदलाव करने की मांग करते हुए कहा कि कानूनी दांव-पेंच के चलते ही लोग हैदराबाद एनकाउंटर पर खुशियां मनाते है। इससे पहले शिवराज ने ट्वीट कर वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह पर हमला बोला था।

शिवराज ने ट्वीट का लिखा है कि हर बार एक नया क़ानूनी पेंच फंसाकर अपने आप को फाँसी से बचाने का प्रयास करने वाले बेटी #Nirbhaya के हत्यारे नरपिशाचों को किसी भी तरह की कोई भी छूट न देकर जल्द से जल्द फाँसी पर लटका देना चाहिए।

शिवराज ने अगले ट्वीट में लिखा है कि जैसा कि कहा गया है कि न्याय मिलने में हुई देरी, न्याय न मिलने के बराबर है। यही सब क़ानूनी दाँवपेंच के चलते जनता हैदराबाद में हुए एंकाउंटर पर ख़ुशियाँ मनाती है। उसको त्वरित न्याय और उचित सजा मानती है। जनता का ये आक्रोश समाज में अराजकता पैदा कर सकता है।

शिवराज ने अपने आखरी ट्वीट में लिखा है कि मासूम बिटियाओं के साथ बलात्कार जैसे घिनौने अपराध करने वालों का सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।मैं संसद से अनुरोध करता हूँ कि क़ानून में ज़रूरी बदलाव कर ऐसा किया किया जाए कि ऐसे अपराधियों को बिना कोई देरी किए मिली हुई फाँसी की सजा का क्रियान्वयन तुरंत हो।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews