एमपी में जल्द लागू किया जा सकता है फास्टैग सिस्टम

एमपी में जल्द लागू किया जा सकता है फास्टैग सिस्टम

भोपाल।मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार जल्द ही नया नियम लागू करने वाली है। खबर है कि नेशनल हाईवे के टोल नाकों पर फास्टैग सर्विस शुरू होने के बाद अब राज्य सरकार ने भी अपनी सड़कों पर यह व्यवस्था लागू करने का फैसला कर लिया है।

एमपीआरडीसी के प्रदेशभर में 75 टोल नाकों पर गुजरने वाले सभी वाहनों पर फास्टैग सिस्टम प्रभावी होगा। इस सिस्टम की खास बात यह है कि इसमें आम व्यक्ति पर बैंक के सर्विस चार्ज के रूप में लगने वाली एक्वायरिंग फीस राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल नाकों की बजाए तीन गुना कम लगेगी। प्रदेश के टोल नाकों पर इस सर्विस के शुरू होने से राहगीरों के समय की बचत होगी, साथ ही लाइन में लगने के झंझट से वाहन मालिक मुक्त हो जाएगा।

क्या है फास्टैग?

चार पहिया व्हीकल की विंडस्क्रीन पर फास्टैग लगाया जाता है। इस कार्ड में रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफेकशन लगा होता है। जैसे ही गाडी टोल प्लाजा पर पहुंचती है वो वहां लगा सेंसर गांडी की विंडस्क्रीन पर लगे कार्ड के संपर्क में आता है जिसके बाद व्यक्ति के अकाउंट से टोल टैक्स पर जो भी शुल्क कटना होगा वो खुद ही कट जाएगा। इस तरह से बिना रूके ही टोल टैक्स का भुगतान ऑटॉमेटिक तरीके से हो जाएगा। वाहन में लगा यह फास्टैग कार्ड जनता के प्रीपेड खाते के एक्टिव होने के बाद ही अपना काम करता है, और फास्टैग अकाउंट में बैलेंस खत्म हो जाएगा, तो उसे दुबारा रिचार्ज करना पड़ेगा।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews