सेंट्रल जेल में सख्ती, प्रहरी की दिन में दो बार स्क्रीनिंग, बाहरी को अंदर आने पर रोक

सेंट्रल जेल में सख्ती, प्रहरी की दिन में दो बार स्क्रीनिंग,  बाहरी को अंदर आने पर रोक

भोपाल। इंदौर सेंट्रल जेल में कोरोना की दस्तक के बाद अब भोपाल में सेंट्रल जेल के अफसर सख्त हो गए है| जेल के अंदर शारीरिक दूरी का ख्याल रखा जा रहा है। बंदियों को संक्रमण से बचाने किसी भी बाहरी को जेल के अंदर प्रवेश नहीं दिया जा रहा है| जो जेल प्रहरी जेल के बाहर तैनात है उनको भी अंदर नहीं आने दिया जा रहा है| पैरोल से वापस आने वाले बंदियों को भी पुरानी जेल में ही रखा जाएगा। जेल के अंदर शारीरिक दूरी का ख्याल रखा जा रहा है।

कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर जेल के अफसरों ने जेल के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। जिसमे जेल के साथ अब जेल प्रहारियों के आवास पर पहरा लगा दिया है। जेल परिसर के दोनों तरफ के गेट पर जेल प्रहारियों को तैनात कर दिया है। किसी भी बाहरी को अंदर आने पर रोक लगा दी है। अब जेल मे जो जहां अपनी सेवाएं दे रहा है। वह उसी स्थान पर सेवाएं देगा। वह नए प्रहरियों और बंदियों के भी संपर्क मं नहीं आएगा। इसलिए जेल प्रबंधन सख्ती दिखाई है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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