पुश्तेनी दुकान पर कब्जा कर रहे बदमाश

पुश्तेनी दुकान पर कब्जा कर रहे बदमाश

भोपाल। पुराने शहर के लोहा बाजार स्थित मकान नम्बर 67 की पुश्तेनी दुकान पर दबंग लोग कब्जा करने के लिए दुकानदार को प्रताड़ित कर रहे हैं। इनका साथ थाना पुलिस सहित क्राईम ब्रांच, नगर निगम और जिला प्रशासन के कर्मचारी दे रहे हैं। जबकि पुरा प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित है और स्टे भी मिला हुआ है।

दुकान संचालक राजीव हरायाण ने बताया कि लोहा बाजार स्थित हमारी बर्तन की पुश्तेनी दुकान है। आसपास की अन्य दुकाने भी हमारे परिवार की हैं और परिवार के सदस्य अपने हिस्से में आईं दुकानों का संचालन करते हैं। कुछ समय पूर्व परिवार की एक अन्य दुकान को किसी कीर्तिश ओशवाल ने खरीद ली है। वह अपने आप को शहर का दबंग व्यापारी बताता है। ओशवाल लगातार हमें पुलिस, नगर निगम, क्राइम ब्रांच की मदद से प्रताड़ित कर रहा है। वह चाहता है कि आसपास के दुकानदार भी अपनी दुकान मुझे दे दें, इसलिए कभी अतिक्रमण अधिकारी कमर साकिब से दवाब बनवाता है तो कभी पुलिस और क्राइम ब्रांच वाले दुकान खाली करने की धमकी देते हैं। दो दिन पहले रात 9-10 बजे कुछ बदमाश मुंह पर कपड़ा लगाकर आए और दुकान में तोड़फोड़ की, लेकिन पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने की जगह हमें ही धमकी दे रही है।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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