सरकार का शराब ठेकेदारों को हरसंभव सहायता देने का इरादा, यात्रा पास के रूप में मान्य होगा परमिट

सरकार का शराब ठेकेदारों को हरसंभव सहायता देने का इरादा, यात्रा पास के रूप में मान्य होगा परमिट

भोपाल

करीब एक माह तक शराब दुकानें बंद रहने के कारण 1800 करोड़ के लगभग जो राजस्व का नुकसान हुआ है, अब सरकार उसकी पूरी भरपाई कर लेना चाहती है। शराब दुकानों को लेकर लिये जा रहे फैसलों को देखते हुए तो ऐसा ही लगता है।

दुकान खोलने के समय में बढ़ोत्तरी के बाद अब शिवराज सरकार ने ये तय किया है कि शराब ठेकेदारों को उसके संचालन में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। इसके लिये वाणिज्यिक कर विभाग ने प्रत्येक जिले के कलेक्टर को निर्देश दिए है कि ठेका संचालन में अगर किसी प्रकार की परेशानी की शिकायत मिलती है तो उसे प्राथमिकता से सुलझाया जाए। इतना ही नहीं, ठेकेदारों और उनके कर्मचारियों को आने-जाने के लिए पास भी दिए जाएंगे। जिला आबकार अधिकारी द्वारा जारी किए गए परमिट को यात्रा पास के रूप में भी मान्य किया जाएगा।

बता दें कि शराब व्यापार सरकार के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत है। लॉकडाउन के दौरान जब तक शराब की दुकानें बंद रही, सरकार को राजस्व का बड़ी हानि उठानी पड़ी है। इसीलिए अब तब शराब दुकानों को खोलने की अनुमति दे दी गई है, सरकार हर तरह से सुनिश्चित कर लेना चाहती है कि इसमें किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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