
डॉ सत्यकांत त्रिवेदी (वरिष्ठ मनोचिकित्सक) : आत्महत्या केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। इस समस्या से निपटने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अक्सर देखा जाता है कि आत्महत्या की घटनाओं की रिपोर्टिंग सनसनीखेज़ और विस्तार से की जाती है। किसी व्यक्ति के आत्महत्या करने के तरीके, स्थान और व्यक्तिगत परिस्थितियों को उभारकर प्रस्तुत करना न केवल पीड़ित के प्रति असंवेदनशील है, बल्कि समाज में अन्य संवेदनशील लोगों के लिए खतरनाक संदेश भी देता है। यह स्थिति “Werther Effect” के रूप में जानी जाती है, जिसमें मीडिया रिपोर्टिंग से आत्महत्या की नकल करने वाले मामलों में वृद्धि हो सकती है।
“Papageno Effect” आशा और जीवन की ओर ले जाने वाला प्रभाव
इसके विपरीत, “Papageno Effect” आशा और जीवन की ओर ले जाने वाला प्रभाव है। यह उस स्थिति को दर्शाता है जब मीडिया आत्महत्या की खबरों को इस तरह प्रस्तुत करता है कि पाठकों या दर्शकों को यह संदेश मिले कि कठिन परिस्थितियों में भी वैकल्पिक समाधान और मदद उपलब्ध है। जब समाचार माध्यम किसी व्यक्ति के संघर्ष और उसके सफलतापूर्वक संकट से उबरने की कहानी प्रस्तुत करते हैं, तो यह दूसरों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
नैतिक दिशा निर्देशों का पालन करे
मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह आत्महत्या की खबरों को रिपोर्ट करते समय वैज्ञानिक और नैतिक दिशा निर्देशों का पालन करे। इसमें आत्महत्या की पद्धति और स्थान का वर्णन न करना, तस्वीरें या निजी पत्र प्रकाशित न करना और घटना को ग्लैमराइज न करना शामिल है। इसके बजाय मीडिया को यह बताना चाहिए कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हैं, हेल्पलाइन नंबर मौजूद हैं और परिवार, मित्र व समाज का सहयोग जीवन बचा सकता है।
समाज में संदेश
संवेदनशील रिपोर्टिंग से समाज में यह संदेश फैलता है कि कठिनाई आने पर मदद लेना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस है। यह बदलाव केवल पत्रकारिता का दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि मीडिया किस प्रकार अपनी कलम और कैमरे के माध्यम से जीवन और मृत्यु के बीच का फर्क तय कर सकता है। पापागेनो इफ़ेक्ट को अपनाकर मीडिया न केवल खबर दे सकता है, बल्कि उम्मीद भी बाँट सकता है। यही वह कदम है जो हजारों ज़िंदगियों को बचाने में सहायक हो सकता है। यदि आप या आपका कोई परिचित आत्महत्या के विचारों से जूझ रहा है, तो तुरंत मदद लें। भारत में उपलब्ध हेल्पलाइन नंबर: 1441618008914416 आप अकेले नहीं हैं। मदद हमेशा उपलब्ध है।
लेखक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी वरिष्ठ मनोचिकित्सक है…
