भोपाल। मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालय अपने स्तर पर अब कोई भी नया डिग्री कोर्स नहीं शुरू कर पाएंगे। दरअसल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानि यूजीसी ने प्रदेश सहित देशभर के सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि कोई भी यूनिवर्सिटी अपने स्तर पर कोई डिग्री कोर्स शुरू नहीं करेगी। कोई भी नया कोर्स अगर शुरू करना है तो 6 महीने पहले यूजीसी को बताना होगा और साथ में प्रस्ताव भेजना पड़ेगा। जब तक उस कोर्स पर यूजीसी की तरफ से सहमति पत्र नहीं आ जाता है तब तक कोर्स शुरू नहीं कर पाएंगे विश्वविद्यालय।
गौरतलब है कि बीते कुछ सालो में देखा गया है कि देश की बहुत से विवि छात्रों को गलत डिग्री देकर मुकदमे और बहुत सी कानूनी परेशानियां पैदा कर रहे हैं। जिस वजह से यूजीसी को दिक्कतों का सामना करना पड रहा है क्योंकि बहुत बार देखा गया है कि विवि छात्रों को डिग्री देने के मामले में यूजीसी के तय मापदंड और नियमों का पालन नहीं करते हैं…जिसका खामियाजा बाद में भुगतना पड़ता है …इसलिए यूजीसी ने यह कदम उठाया है और साथ ही विवि को कड़े शब्दों मे कहा कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें….बता दें कि यूजीसी की समेकित सूची विवि अनुदान आयोग अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त डिग्री कोर्स की सूची यूजीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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Gaurav Sharma पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है।