उमंग सिंघार का आरोप “MP में जनसंवाद बना औपचारिकता”, मुख्यमंत्री से जांच और निर्देशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने जनसंवाद अभियान पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि यह योजना जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अधिकांश कलेक्टर गांवों में रात्रि प्रवास नहीं कर रहे हैं और सिर्फ औपचारिक दौरे कर वापस लौट जाते हैं।
Umang Singhar

उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश की जनसंवाद व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर अधिकारी गांवों में रात्रि प्रवास करने से बच रहे हैं, जिससे ये पूरी पहल सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से उन्होंने कहा कि प्रदेश के करीब 90 प्रतिशत कलेक्टरों ने गांवों में रात बिताने से परहेज कर लिया है, जिससे सरकार की मंशा महज़ कागजों तक सिमटकर रह गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की है कि इस मामले की जांच कराई जाए और निर्देश न मानने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

उमंग सिंघार ने जनसंवाद अभियान को लेकर अधिकारियों पर लगाए आरोप

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई जनसंवाद और चौपाल आधारित व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन को अधिक संवेदनशील और सक्रिय बनाना था, लेकिन वास्तविकता इसके उलट दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि लगभग 90 प्रतिशत कलेक्टर अब तक गांवों में रुककर जनता से सीधा संवाद स्थापित नहीं कर पाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जिलों में अधिकारी सिर्फ दौरा कर फोटो और वीडियो तक सीमित रहते हैं और फिर मुख्यालय लौट जाते हैं, जिससे ग्रामीण समस्याओं का वास्तविक समाधान नहीं हो पा रहा है।

सीएम से की जांच और कार्रवाई की मांग  

नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि गांवों में आज भी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, लेकिन प्रशासनिक मशीनरी का फोकस कागजी कार्रवाई और औपचारिक कार्यक्रमों तक सिमट गया है। उन्होंने कहा कि जब अधिकारी ही जनता के बीच समय नहीं बिताएंगे तो समस्याओं की वास्तविक स्थिति सामने कैसे आएगी। उमंग सिंघार ने कहा कि जिला स्तर पर जनसंवाद की प्रक्रिया कई जगह सिर्फ दिखावे तक सीमित हो गई है, जिससे ग्रामीणों का विश्वास कमजोर हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही ये भी कहा है कि जिन अधिकारियों ने निर्देशों की अनदेखी की है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि प्रशासनिक जवाबदेही तय हो सके।

बता दें कि प्रदेश सरकार ने ग्रामीण प्रशासन को मजबूत करने और जनता से सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से जनसंवाद और चौपाल व्यवस्था को बढ़ावा देने के निर्देश दिए थे। इसके तहत वरिष्ठ अधिकारियों को गांवों में रात्रि प्रवास कर स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनने और मौके पर समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया था। इस पहल का उद्देश्य यह था कि प्रशासन सिर्फ जिला मुख्यालयों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों में जाकर योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करे और जनता की शिकायतों का त्वरित निवारण करे। हालांकि जमीनी स्तर पर इस व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने शिकायत की है कि अधिकारी आते तो हैं, लेकिन उनका दौरा औपचारिकता तक सीमित रहता है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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