
Umang Singhar
मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रीवा के रोझौही-सरई कला क्षेत्र में टाटा पावर की प्रस्तावित परमाणु परियोजना को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामसभा के विरोध के बावजूद परियोजना के लिए ड्रिलिंग की अनुमति जारी की गई। उन्होंने कथित सहमति पत्र की सत्यता की जांच, अनापत्ति प्रमाण पत्र निरस्त करने और परियोजना से जुड़े सुरक्षा एवं पर्यावरणीय अध्ययनों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। वह एक दिन पहले परियोजना के विरोध में जल सत्याग्रह कर रहे ग्रामीणों से मुलाकात कर आंदोलन को समर्थन दे चुके हैं।
भोपाल में आयोजित प्रेस वार्ता में सिंघार ने कहा कि रोझौही और सरई कला क्षेत्र में 1,500 से अधिक परिवार और 5,000 से ज्यादा लोग रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या में आदिवासी, अनुसूचित जाति के परिवार, छोटे किसान और खेतिहर मजदूर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित परियोजना से इन परिवारों की सुरक्षा, आजीविका और भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। आंदोलन के दौरान बुजुर्ग आदिवासी महिला विमला कोल की मृत्यु का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों की चिंताओं पर सरकार से जवाब मांगा।
ग्रामसभा की असहमति के बाद भी NOC जारी करने पर सवाल
उमंग सिंघार ने कहा कि 3 सितंबर 2026 को ग्रामसभा ने ड्रिलिंग के लिए सर्वसम्मति से इनकार कर दिया था। पंचायत ने 5 सितंबर को पत्र क्रमांक 48 के माध्यम से इसकी सूचना कलेक्टर को दी थी। इसके बावजूद 23 सितंबर को NOC क्रमांक 147/2026 जारी की गई, जिसमें 4 सितंबर के कथित सहमति पत्र का उल्लेख था। उन्होंने कहा कि सरपंच कोमल संजय सिंह ने 8 अक्टूबर को संभागायुक्त और कलेक्टर से शिकायत कर कथित सहमति पत्र की जांच और NOC निरस्त करने की मांग की थी।
उन्होंने सवाल किया कि जब ग्रामसभा ने ड्रिलिंग की अनुमति देने से इनकार कर दिया था तो प्रशासन ने किस आधार पर NOC जारी की? कथित सहमति पत्र की सत्यता की जांच के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई है? उन्होंने सरकार से पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
‘भाजपा राज में सब बिकाऊ है’
उमंग सिंघार ने केंद्र सरकार के SHANTI Act, 2025 का उल्लेख करते हुए निजी कंपनियों के लिए परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित करने और संचालित करने का रास्ता खोलने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भी निजी परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के प्रस्ताव सामने आए हैं। इनमें रीवा में टाटा पावर, कटनी और छिंदवाड़ा में अडानी समूह तथा मंदसौर में बजाज समूह के प्रस्ताव शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास परियोजनाओं के नाम पर गरीबों, आदिवासियों और किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। प्रभावित परिवारों की सहमति, सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़े सवालों का समाधान किए बिना आगे बढ़ना उचित नहीं है।
परमाणु संयंत्र की सुरक्षा और पर्यावरणीय अध्ययन पर मांगा जवाब
नेता प्रतिपक्ष ने परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) के 2014 के सुरक्षा मानकों का हवाला देते हुए प्रस्तावित संयंत्र के आसपास सुरक्षा और निगरानी क्षेत्रों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार बताए कि प्रस्तावित रिएक्टर कहां स्थापित किए जाएंगे और संबंधित क्षेत्रों में कितने गांव, परिवार, कृषि भूमि तथा वनाधिकार पट्टे आते हैं।
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रभावित आबादी की सुरक्षा और संभावित विस्थापन को लेकर कोई योजना तैयार की गई है। परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA), भूकंपीय जोखिम, जल उपलब्धता, आबादी के वितरण और विकिरण के संभावित प्रभावों का अध्ययन कराया गया है या नहीं, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। कांग्रेस नेता ने आपातकालीन तैयारी और आपदा प्रबंधन योजना को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी योजनाएं तैयार हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों को संभावित जोखिमों और सुरक्षा उपायों की जानकारी मिल सके।
चेरनोबिल और फुकुशिमा की दुर्घटनाओं का दिया हवाला
उमंग सिंघार ने यूक्रेन के चेरनोबिल में 1986 और जापान के फुकुशिमा में 2011 की परमाणु दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से सबक लेना जरूरी है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि रीवा में प्रस्तावित परियोजना के लिए स्थानीय आबादी, पर्यावरण और आपातकालीन सुरक्षा का आकलन किन आधारों पर किया गया है। उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों, किसानों और वनाधिकार पट्टाधारकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेता ने सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस प्रदेश में लोग दूषित पानी पीकर मर जाएं, मासूम बच्चे जहरीली कफ सिरप से जान गंवा दें वहां की सरकार परमाणु बिजली संयंत्र की सुरक्षा की गारंटी कैसे देगी।
केन-बेतवा परियोजना प्रभावितों के समर्थन में भी उठाई आवाज
उमंग सिंघार ने 24 अक्टूबर को पन्ना में केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों, किसानों और आंदोलनकारियों से मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने 27 दिनों से अधिक समय से आमरण अनशन पर बैठे अमित भटनागर को नारियल पानी पिलाकर उनका अनशन समाप्त करवाया था और न्याय की लड़ाई जारी रखने का भरोसा भी दिलाया।उन्होंने पन्ना जिला जेल में बंद दिव्या अहिरवार से मुलाकात की और उनकी मां से भी मिलकर परिवार की पीड़ा जानी। सिंघार ने सवाल उठाया कि क्या अपने अधिकारों और न्याय के लिए आवाज उठाना अपराध है?
उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री ने एक महीने के भीतर जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया था लेकिन अब तक न तो जांच का स्पष्ट परिणाम सामने आया है और न ही प्रभावित परिवारों को न्याय मिला है। कांग्रेस नेता ने सरकार से रीवा की प्रस्तावित परमाणु परियोजना और केन-बेतवा परियोजना से जुड़े मामलों में प्रभावित लोगों की शिकायतों पर कार्रवाई करने तथा उनके अधिकारों और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की है।
आम जनता की लाशों पर उद्योगपतियों का साम्राज्य खड़ा करना चाहती है भाजपा सरकार!
विदेशों में जब न्यूक्लियर पावर प्लांट बंद किए जा रहे हैं, तो भाजपा सरकार नियमों को ताक पर रखकर घनी आबादी के बीच पावर प्लांट क्यों लगाना चाहती है?@CMMadhyaPradesh @DrMohanYadav51 @rshuklabjp@INCIndia… pic.twitter.com/HhoA9cUHOR
— Umang Singhar (@UmangSinghar) October 26, 2026

