उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश में महिला सुरक्षा पर उठाए सवाल, सरकार से कानूनी प्रक्रिया की सख्त समीक्षा करने की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने दुष्कर्म के आरोपियों के जमानत पर छूटने के बाद दोबारा अपराध करने के मामलों को लेकर कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के साथ ये सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि आरोपियों को आसानी से जमानत ना मिले।
Umang Singhar Opposition Leader

Umang Singhar

मध्यप्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदेश में “दुष्कर्म, जमानत फिर दुष्कर्म” जैसे 902 मामले सामने आए हैं जो न सिर्फ चिंताजनक हैं, बल्कि पूरी आपराधिक न्याय प्रणाली की गंभीर विफलता भी उजागर करते हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि यह आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं बल्कि उन खामियों का प्रतीक है जो कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में आरोपी जमानत पर रिहा होने के बाद दोबारा उसी प्रकार के जघन्य अपराध को अंजाम दे रहे हैं, जिससे समाज में भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।

एमपी में महिला सुरक्षा पर सवाल 

मध्यप्रदेश में दुष्कर्म के मामलों में एक गंभीर और दोहराया जाने वाला पैटर्न सामने आया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 साल में ऐसे 902 मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें आरोपी पहले दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार हुए, जमानत पर रिहा हुए और फिर से उसी तरह का जघन्य अपराध दोहराया। कई मामलों में तो आरोपी ने उसी पीड़िता को दोबारा निशाना बनाया।

उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधा

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। उमंग सिंघार ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए मध्यप्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि “महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के नाम पर किए गए सारे दावे और नारे आज खोखले साबित हो रहे हैं, 902 मामले भाजपा सरकार की विफलता का आईना हैं।” कांग्रेस नेता ने पूछा है कि आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं। इसके पीछे कमजोर पैरवी, आरोपियों की ढीली निगरानी और प्रशासनिक लापरवाही महत्वपूर्ण कारण है। उन्होंने कहा कि इन कमियों के चलते अपराधियों को कानून का डर नहीं रह गया है और वे बार-बार अपराध करने का साहस जुटा पा रहे हैं।

कानूनी प्रक्रिया की समीक्षा की मांग 

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे दावे अब खोखले साबित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं, जिसका परिणाम इन मामलों के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि पीड़िताएं न्याय पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जबकि दूसरी ओर आरोपियों को आसानी से कानूनी सहायता और जमानत मिल जाती है। यह स्थिति न्याय प्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है और पीड़ितों के मनोबल को तोड़ती है। उमंग सिंघार ने इस पूरे मामले को “अमानवीय और असहनीय” बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और कहा कि यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और प्रशासनिक जवाबदेही का भी प्रश्न है। इसी के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, सरकार अपनी कानूनी प्रक्रिया की सख्त समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि आरोपियों को आसानी से जमानत ना मिल सके।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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