जब दिग्विजय और सिंधिया का एक दूसरे से हुआ आमना-सामना, फोटो वायरल

जब दिग्विजय और सिंधिया का एक दूसरे से हुआ आमना-सामना, फोटो वायरल

भोपाल| मध्य प्रदेश की राजनीति में एक दूसरे के धुर-विरोधी दो दिग्गज नेताओं का जब आमना सामना हुआ तो एक तस्वीर सामने आई जिसने सभी की नजरें अपनी तरफ खींच ली| राज्यसभा (Rajyasabha) में आज 45 नवनिर्वाचित सदस्यों ने शपथ ग्रहण की| कांग्रेस (Congress) छोड़कर बीजेपी (BJP) में गए ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने भी राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली| इस दौरान सिंधिया और दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) का आमना सामना हुआ| दोनों ने एक-दूसरे के सामने हाथ जोड़कर अभिवादन किया|

ज्योतिरादित्य सिंधिया पहली बार राज्यसभा पहुंचे हैं। वहीं, बीजेपी के दूसरे सांसद सुमेर सिंह सोलंकी भी पहली बार राज्यसभा पहुंचे हैं। इस दौरान राज्यसभा से एक दिलचस्प तस्वीर आई जो अब वायरल हो रही है| सांसदों के शपथ लेने के दौरान एक मौक़ा ऐसा भी आया जब सिंधिया और दिग्विजय आमने सामने आ गए| दोनों नेताओं ने एक दूसरे का हाथ जोड़कर अभिवादन किया| इस दौरान वहां कांग्रेस के सीनियर नेता गुलाम नबी आजाद भी मौजूद थे| सिंधिया ने उनका भी हाथ जोड़कर अभिवादन किया|

दोनों नेताओं के बीच रिश्ते किसी से छुपे नहीं है| कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने के बाद सिंधिया दिग्विजय के निशाने पर रहे हैं| वे उन पर लगातार हमले बोल रहे हैं| हालाँकि कांग्रेस में रहने के दौरान भी सिंधिया और दिग्विजय के बीच तल्खियां ही रही| दोनों की लड़ाई पर्दे के पीछे चलती थी। लेकिन सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद अब दोनों नेताओं के बीच खुलकर वार पलटवार देखने को मिलते हैं|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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