लालू यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका, ‘लैंड फॉर जॉब’ केस में FIR रद्द करने की मांग खारिज, HC ने कहा- याचिका में दम नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को 'जमीन के बदले नौकरी' मामले में राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने की उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि इसमें कोई दम नहीं है। यह मामला लालू के रेल मंत्री रहते हुए कथित तौर पर जमीन लेकर नौकरी देने से जुड़ा है।
लालू यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका, ‘लैंड फॉर जॉब’ केस में FIR रद्द करने की मांग खारिज, HC ने कहा- याचिका में दम नहीं

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने ‘जमीन के बदले नौकरी’ से जुड़े कथित घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी। जस्टिस रविंदर डुडेजा ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कहा, “याचिका में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।”

इस फैसले के साथ ही लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और अन्य आरोपियों पर मामले की सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। लालू यादव ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17ए के तहत मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक पूर्व मंजूरी नहीं ली थी, इसलिए यह पूरी कार्यवाही कानूनी रूप से अवैध है। हालांकि, अदालत ने इस दलील को नहीं माना।

क्या है ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाला?

यह मामला लालू प्रसाद यादव के 2004 से 2009 के बीच केंद्रीय रेल मंत्री के कार्यकाल से जुड़ा है। आरोप है कि इस दौरान भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन (जबलपुर, मध्य प्रदेश) में ‘ग्रुप डी’ के पदों पर कई भर्तियां की गईं। सीबीआई का दावा है कि इन नियुक्तियों के बदले में उम्मीदवारों या उनके परिवारों से लालू यादव के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीनें कथित तौर पर उपहार में ली गईं या कम दामों पर हस्तांतरित कराई गईं।

CBI की जांच और कानूनी प्रक्रिया

सीबीआई ने इस मामले में 18 मई, 2022 को लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, दो बेटियों और अन्य अज्ञात सरकारी अधिकारियों व निजी व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जांच एजेंसी ने 2022, 2023 और 2024 में तीन आरोपपत्र भी दायर किए हैं। लालू यादव ने अपनी याचिका में इन आरोपपत्रों और उन पर संज्ञान लेने के अदालती आदेशों को भी रद्द करने की मांग की थी।

फिलहाल, 77 वर्षीय लालू प्रसाद यादव और इस मामले से जुड़े अन्य सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब निचली अदालत में उनके खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ेगी, जो उनके लिए एक बड़ी कानूनी चुनौती है।

Shyam Dwivedi
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Shyam Dwivedi

7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi →
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