राज्यसभा सांसद बनने के बाद अब नीतीश कुमार को कितना मिलेगा वेतन , भत्तों के अलावा कौन-कौन सी दी जाएगी सुविधाएं, जानिए यहां

वर्तमान में भारत में राज्यसभा सांसदों को हर महीने लगभग 1.24 लाख रुपये वेतन मिलता है।इसके अलावा अन्य भत्ते और कई सुविधाएं भी मिलती है। आइए जानते हैं राज्यसभा सांसद बनने पर अब नीतीश कुमार को कितनी सैलरी और कौन-कौन से भत्ते दिए जाएंगे।
Bihar CM Nitish Kumar

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ग्रहण कर ली है। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें पद की शपथ दिलाई।  इसी के साथ नीतीश कुमार ने चारों सदन (लोकसभा, बिहार विधान परिषद , बिहार विधानसभा और राज्यसभा) का सदस्य बनने का रिकॉर्ड भी बना लिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं राज्यसभा सांसद बनने पर नीतीश कुमार कितनी सैलरी मिलेगी। कौन-कौन से भत्ते मिलेंगे। इसके अलावा अन्य कौन-कौन सी सुविधाएं दी जाएंगी। आइए जानते हैं विस्तार से….

जानिए एक राज्यसभा सांसद को कितना मिलता है वेतन-भत्ता

  • वर्तमान में राज्यसभा या लोकसभा के किसी भी सांसद को हर महीने करीब 1.24 लाख रुपये तक मूल वेतन मिलता है यानी सांसद बनने के बाद अब नीतीश कुमार को भी इसी रेंज में बेसिक सैलरी मिलेगी।
  • इसके अलावा हर महीने 75 हजार रुपये कार्यालय खर्च, 50 हजार रुपये स्टाफ वेतन और 25 हजार रुपये स्टेशनरी के लिए मिलते है।
  • संसद सत्र के दौरान 2500 रुपये प्रतिदिन का भत्ता दिया जाता है। वही अपने क्षेत्र के कार्यों के लिए 87,000 रुपये प्रति माह निर्वाचन भत्ता दिया जाता है।

अन्य सुविधाएं

  • दिल्ली में सरकारी आवास
  • हर साल में 34 मुफ्त हवाई यात्रा
  • रेल यात्रा में फर्स्ट क्लास की सुविधा
  • फ्री स्वास्थ्य सुविधा
  • बिजली और पानी तय सीमा तक मुफ्त
  • कार्यकाल समाप्त होने के बाद पूर्व सांसदों को 31,000 रुपये प्रति माह की पेंशन

बिहार के मुख्यमंत्री को कितनी मिलती है सैलरी ?

सरकारी नियमों के अनुसार, बिहार के मुख्यमंत्री को करीब 2.5 लाख रुपये मासिक वेतन और भत्ते मिलते हैं।निर्वाचन क्षेत्र भत्ता करीब 50-55 हजार और सत्कार भत्ता लगभग 30-35 हजार रुपए मिलता है। मुख्यमंत्री को सरकारी बंगला, लग्जरी गाड़ियां, टॉप सिक्योरिटी, फ्री ट्रैवल और पूरा मेडिकल कवरेज मिलता है। साथ ही पर्सनल स्टाफ और अन्य प्रशासनिक सुविधाएं भी उपलब्ध रहती हैं।

नोट : ये जानकारी विभिन्न माध्यमों से जुटाई गई है, इसमें फेरबदल भी हो सकता है। यह आंकड़े अनुमान के तौर पर दर्शाए गए है।

Pooja Khodani
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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