सोसाइटी के कर्ताधर्ता ने धूप में लू लगने किसानों को छोड़ा, हो रहे है परेशान

सोसाइटी के कर्ताधर्ता ने धूप में लू लगने किसानों को छोड़ा, हो रहे है परेशान

मंदसौर।तरुण राठौर

लॉक डाउन कर्फ्यू के चलते पूरा जिला बन्द है। ऐसे में किसानों को राहत पहुंचा हेतु सरकार ने समर्थ मूल्य पर गेंहू खरीदी कर रही है। जिसके पैसे सरकार सीधे किसानों के खाते में डाल रही है। जिससे निकालने के लिए किसान सोसाइटी की बैंको पर पहुंच रहे है। जहां पर सोसाइटी के कर्ताधर्ता ने बेचारो को लू लगने के लिए खुले आसमान के तले छोड़ दिया है। जिसकी वजह से किसान कागज की लाइन लगा कर गेट के पास जाकर भीड़ लगाकर खड़े है।

ऐसा ही मामला दलौदा सोसाइटी बैंक का आया है। जहां पर सोसाइटी के कर्ताधर्ता ने किसानों को सुविधा नही देते हुए लू लगने के लिए खुले आसमान के नीचे छोड़ा है।जहां पर कोरोना के बढ़ते संकट को देखे हुए सोसाइटी के कर्ताधर्ताओ ने कोई उन किसानों लिए कोई सुविधा नहीं की है। जबकि सरकार का आदेश है कि सोसाइटी में पैसे निकालने आने वाले किसानों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए साबुन से हाथ धुलाए। सोसाइटी के कर्ताधर्ता है कि नियमों को ताक पर रखते हुए उन्होंने न तो गर्मी से बचने के लिए टेंट की व्यवस्था की और नहीं पीने के पानी की।

जिसकी वजह से बेचारे किसान सोसाइटी बैंक के बाहर तेजगर्मी में तप रहे है। जब उन्हें प्यास लग रही है तो सोसाइटी में पीने का पानी नहीं है। ऐसे में वह बहुत परेशान हो रहे है। जबकि तादाब अधिक होने से परिसर के बाहर लाइन लगवाई गई है। क्योंकि बैंक कर्मी एक एक जने को नंबर आने पर अंदर ले रहे है। ऐसे में किसान मजबूरी में तेज धूप में तपने को मजबूर है क्योंकि इन दिन तापमान अपने पूरे सबाप पर है। जिसकी वजह से बेचारे किसानों को लू लगने का डर है। पर कर्ताधर्ता है कि उन्हें किसानों की कोई चिंता नही है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews