रीवा के शहीद दीपक को CM ने दी श्रद्धांजलि, जवान के परिवार के लिए की बड़ी घोषणा

रीवा के शहीद दीपक को CM ने दी श्रद्धांजलि, जवान के परिवार के लिए की बड़ी घोषणा

रीवा।

लद्दाख के गलवान घाटी में बीते दिनों भारतीय जवानों और चीनी सैनिकों के बीच हुए हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। शहीद जवानों में मध्यप्रदेश के रीवा(Rewa) जिले का एक जवान भी शामिल था।  रीवा के रहने वाले शहीद दीपक कुमार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह (Shivraj Singh Chouhan) चौहान ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। सीएम शिवराज ने कहा कि गलवान घाटी में हुए झड़प में दीपक कुमार शहीद हो गए। जवान को नमन करते हुए सीएम शिवराज सिंह चौहान के कई अहम घोषणा भी की। वहीँ मुख्यमंत्री ने कहा है कि जवान का परिवार अब हमारा परिवार है।

वहीँ ट्वीट करते हुए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने रीवा के लाल दीपक सिंह की शहादत को नमन किया है। सीएम शिवराज ने शहीद दीपक सिंह के परिजनों को 1 करोड़ रुपए सम्मान निधि, एक पक्का मकान और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है। बता दें कि जवान दीपक सिंह कर्चुलियान थाना क्षेत्र के फरेंदा के रहने वाले थे। बीते नवंबर माह में ही उनकी शादी हुई थी। दीपक सिंह 16 बिहार रेजीमेंट में तैनात थे।

दीपक रीवा के मनगंवा के फरेंदा गांव के रहने वाले थे और बिहार रेजिमेंट में पदस्थ थे। बेटे की शहाद की खबर सबसे पहले उनके पिता को मिली थी। करीब 6 महीने पहले ही दीपक की शाद हुई थी। शहीद दीपक के बड़े भाई प्रकाश सिंह भी सेना में हैं। सूचना के बाद क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। खबर सुनने के बाद नवविवाहिता का गहरे सदमे में डूब गई है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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