Corona Crisis: लॉकडाउन ने रोकी आमदनी, फिर भी कर्मचारियों की जिंदगी संवार रहा भारतीय रेलवे

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जबलपुर।संदीप कुमांर

आमदनी एक रु की नही और खर्च करोड़ो में…ये हाल इन दिनों भारतीय रेल का है।कोरोना वायरस के चलते लगे लॉक डाउन में बीते 22 मार्च 2020 के बाद से रेलवे की कमाई में ग्रहण लग गया।4 माह होने को है रेलवे अपने कर्मचारी-अधिकारियों को जमा पूंजी से वेतन भुगतान कर रही है।ये तो गनीमत है कि मालगाड़ियों के पहिये जाम नहीं हुए नही तो रेल्वे की हालत और खराब हो जाती।हालॉकि रेल्वे ने कुछ ट्रेनों का संचालन जरूर शुरू कर दिया है पर इससे आमदनी न के बराबर है। यात्री गाड़ियों के जाम होने से रेलवे को भारी नुकसान हुआ है।

इसके वावजूद रेलवे अपने कर्मचारियों के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा। लाकडाउन के समय घर पर रहने की सुबिधा,एक जून से कुछ ट्रेन शुरू करने के बाद कर्मियों को स्टेशन पर कार्य कराने के साथ अन्य सुबिधा देने का काम रेल्वे कर रही है। बावजूद इसके जब सब कुछ कर्मचारियों को मिल रहा है इसके बाद भी रेलकर्मी हाजरी लगाकर ड्यूटी से गायब हो रहे है। अपनों को एश कराने इंचार्ज उनकी मनमर्जी के सामने नतमस्तक है। ऐसे में रेलवे का भला नहीं हो सकता।

हम आपको बता दे कि पश्चिम मध्य रेल्वे में कार्यरत कर्मियों को 22 मार्च के बाद से अब भी रेलवे बिना कार्य वेतन दे रही है। रेल्वे में रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाला वाढिज्य विभाग जहां के रेलकर्मियों से रेल्वे को खासा राजस्व प्राप्त होता है।बुकिंग,पार्सल,रिजर्वेशन,टीटी आदि से मिलने वाले राजस्व से रेलवे की अर्थ व्यवस्था मजबूत होती है। लाकडाउन और उसके बाद से रेल्वे को उक्त विभाग से एक रुपए का राजस्व नहीं मिला। वहां के कर्मी आज भी लाकडाउन समझ कर ड्यूटी से काम चोरी कर रहे है।

जबलपुर मंडल ने दिया करोड़ों का वेतन

जानकारी के मुताबिक जबलपुर मंडल में कार्यरत टीटीई को 4 महीने से बिना कार्य वेतन दिया गया। एक जून से जबलपुर से मात्र दो ट्रेन दौड़ने और दर्जन भर ट्रेन गुजरने से अभी मंडल को कोई आय नहीं है फिर भी मंडल वेतन देने तैयार है।अगर महिला टीटीई की बात करे तो 15 महिलाओं को जबलपुर मंडल ने 16 महीने में दो करोड़ से ज्यादा का वेतन दिया जबकि उनसे अब तक 16 हजार रुपए भी नहीं मिले।ये भी जानकारी मिली है कि अन्य रेल मंडलो की अपेक्षा जबलपुर मंडल में लंबे समय से जमे कई अंगदो का राज है। वे नहीं चाहते रेलवे को फायदा हो वे चाहते है कि स्वयं और उनके खास आराम की नोकरी कर बिना कार्य वेतन लेते रहे। खास बात यह है कि ये तमाम जानकारी पमरे जीएम,डीआरएम,विभाग अधिकारी और सतर्कता विभाग को भी पर वो चुप्पी साधे हुए है जिसके चलते लापरवाही,चापलूसी,भ्रस्टाचार,कमीशनखोरी आदि को बढ़ावा मिल रहा है।

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