केंद्रीय सुरक्षा संस्थानों में कोरोना का असर, आयुध निर्माणी प्रदर्शनी पर लगी रोक

केंद्रीय सुरक्षा संस्थानों में कोरोना का असर, आयुध निर्माणी प्रदर्शनी पर लगी रोक

जबलपुर//संदीप कुमार।

कोरोना वायरस का असर अब केंद्रीय सुरक्षा संस्थानों में भी देखने को मिल रहा है।हर वर्ष 18 मार्च को सुरक्षा संस्थान आयुध निर्माणी दिवस मनाते थे पर इस बार कोरोना वायरस के चलते ऑर्डन्स फेक्ट्री बोर्ड ने देश की सभी फेक्ट्रियो को निर्देश दिए है कि निर्माणी दिवस में किसी प्रकार का कार्यक्रम नही होगा।

बता दें कि जबलपुर में चार निर्माणियां मौजूद है। जिसमें ऑर्डंस फैक्ट्री खमरिया,व्हीकल फेक्ट्री जबलपुर, गन कैरिज फैक्ट्री और ग्रे आयरन फाउंड्री फैक्ट्रियां है जो कि सेना के लिए अलग-अलग उत्पाद करती है।पर ये पहला मौका है जब कोरोना वायरस के चलते ओएफके में न ही बमो की प्रदर्शनी लगेगी और नही जीसीएफ में तोप देखने मिलेगी।इतना ही नही सेना के वाहनों की विशेष प्रदर्शनी भी इस बार नही लगेगी। वहीं कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जीसीएफ फैक्ट्री प्रशासन को आवश्यक उपाय करने के लिए पत्र लिखा गया है। इसमें भारत सरकार के द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि फैक्ट्री में बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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