फर्ज की दूरी: कर्त्तव्य के बीच कुछ इस तरह अपने बच्चों से मिल रहे कलेक्टर

फर्ज की दूरी: कर्त्तव्य के बीच कुछ इस तरह अपने बच्चों से मिल रहे कलेक्टर

धार।मो.अंसार

कर्त्तव्य से बड़ा न कोई मजहब होता है और ना ही कोई रिश्ता। आज के महामारी में जाने कितने ही लोग इस भावना के साथ अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर हैं। इसी तरह की एक घटना मध्यप्रदेश के धार से सामने आई है जहाँ एक कलेक्टर अपने कार्य के बीच अपने परिवार को संक्रमण के खतरे से बचाने के लिए दुरी बनाकर अपने बच्चों से बातें करते नजर आ रहे हैं।

दरअसल धार जिले के कलेक्टर श्रीकांत बनोट अपने बच्चों से खिड़की से बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया यह फोटो बहुत वायरल हो रहा है। मां देवास में एसपी हैं और पिता धार में कलेक्टर पद पर अपना फर्ज निभा रहे है। पिछले 2 महीने से माता और पिता इसी तरह से मिलते हैं। यह दूरी फर्ज की दूरी है। इस संकट की घड़ी में एक मां एसपी बनकर देश की सुरक्षा कर रही । तो पिता कलेक्टर बनकर देश की सुरक्षा कर रहा है। इस तस्वीर को देखकर क्या गुजर रही होगी उस माता-पिता पर लेकिन जहां देश सुरक्षा की बात आती है। तो कौन अपना कौन पराया नहीं देखा जाता।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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