50 दिनों से समाजसेवी युवक कर रहे जनता की सेवा, गरीबों को मुफ्त में बाँट रहे सब्जियां

50 दिनों से समाजसेवी युवक कर रहे जनता की सेवा, गरीबों को मुफ्त में बाँट रहे सब्जियां

जबलपुर।संदीप कुमार

कोरोना वायरस संक्रमण के बीच लगे लॉक डाउन में जबलपुर का एक युवा सामजसेवी सोनू दूबे जनता की सेवा करने में जुटा हुआ है।कभी खाना खिलाना तो कभी टेंकरो के माध्यम से पानी पहुँचाना। ये सोनू दुबे बीते 50 दिनों से कर रहे है। आज मिली गरीब जनता को हरी सब्जी,लाइन लगाकर बाटी सब्जियां। बीते 50 दिनों से गरीब और मजदूरों को खाना खिलाने वाले समाजसेवी सोनू दुबे ने आज करीब चार सौ लोगो को हरी सब्जियां भेंट की।

रांझी स्थित सामुदायिक भवन के पास से गरीब और मजदूरों की सब्जियां बाटी गई सब्जियां मिलते ही गरीबो के चहेरे खिल गए।सोनू दुबे ने सब्जियां बॉटने पहले से पर्ची बटवाई थी और उसके बाद लाइन लगाकर सभी लोगो को सब्जियां दी गई। हरी सब्जियों में थी लौकी-भिंडी-टमाटर और कद्दू। समाजसेवी सोनू दुबे ने गरीबो को लाइन लगवाकर सब्जियां बाटी हालांकि बढ़ती भीड़ को काबू करने के लिए सोनू और उनके साथियों को कड़ी मशक्कत भी करनी पड़ी।सोनू दुबे ने पर्ची लेकर आने वाले गरीब और मजदूरों को आधा-आधा किलो कद्दू-भिंडी-लौकी-टमाटर-बैगन बाटी।

अब सप्ताह में दो दिन बाटी जाएगी गरीबो को हरी सब्जियां। सामजसेवी सोनू दुबे ने बताया कि गरीबो को एक टाइम का खाना तो हम बीते 50 दिनों से बाट ही रहे है पर लॉक डाउन के चलते मजदूरों से छिन चुकी मजदूरी के चलते अब इनके पास इतने रु नही है कि वो अपने खाने के लिए हरी सब्जियां खरीद सके यही वजह है कि अब रांझी के गरीब मजदूरों को सप्ताह में दो दिन हरी सब्जियां बाटी जाएगी जिससे कम से कम एक सप्ताह तो वो हरी सब्जियां खा सके।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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