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पूर्व मंत्री का सिंधिया और शिवराज पर निशाना, आपस में तय कर लो कौनसा झूठ बोलना है

Written by:Gaurav Sharma
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पूर्व मंत्री का सिंधिया और शिवराज पर निशाना, आपस में तय कर लो कौनसा झूठ बोलना है

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| कृषि कानून (Farm law) के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन (Farmers Protest) और कांग्रेस (Congress) के आरोपों के बीच बीजेपी (BJP) ने मोर्चा संभाल लिया है और पार्टी नेता अब कृषि कानून के समर्थन में खुलकर मैदान में उतर आये हैं| ग्वालियर (Gwalior) में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra SIngh Tomar) और राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) किसान सम्मलेन में शामिल हुए| यहां सिंधिया ने कांग्रेस पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कृषि सुधार कानून आने से किसान अब स्वतंत्र हो गया है और अपनी उपज देश के किसी भी कोने में जहां उसे ज्यादा राशि मिलेगी वहां बेच सकता है। इस पर पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने तंज कसा है|

दरअसल, बीजेपी नेता सिंधिया ने किसान सम्मलेन को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसानों के ऊपर पाबंदी थी कि वो अपनी उपज कही बाहर नही बेच सकता था, बिचौलियों पर निर्भर था, लेकिन ये जो कृषि सुधार कानून आया है इससे किसान स्वतंत्र हो गया है और अपनी उपज देश के किसी भी कोने में जहां उसे ज्यादा राशि मिलेगी वहां बेच सकता है। सिंधिया के इस बयान पर पीसी शर्मा ने सवाल उठाये हैं| सिंधिया ने आगे कहा सबका साथ-सबका विकास केवल नारा नहीं है, भाजपा की नीयत भी है। आज भी समर्थन मूल्य पर मुहर लगती है। कृषि कानून काे लेकर विपक्ष झूठ के बीज बाे रहा है, कृषि कानून पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पहले अपने गिरेबान में झांके। उन्हाेंने कहा कि यदि हम बदलेंगे नहीं ताे आगे बढ़ेंगे नहीं।

कौनसा झूठ बोलना है तय कर लो : पीसी शर्मा
सिंधिया के बयान पर पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने ट्वीट कर तंज कसा है| उन्होंने लिखा -‘सिंधिया जी ने अपने मुख्यमंत्री शिवराज जी का वह बयान नहीं सुना है या पढ़ा है, जिसमें वह कहते हैं कि जो भी बाहरी व्यक्ति मप्र में अपनी फसल बेंचने आयेगा तो उसका ट्रक राजसात कर लूंगा, पहले आपस में तय करलो कौनसा झूठ बोलना है, कौन सा जुमला फेंकना है|

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
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