गंगा-जमुनी तहज़ीब: हिन्दू-मुस्लिम भाइयों ने मिलकर दी प्रवासी मजदूरों को ईदी, खिलाई सेंवई

गंगा-जमुनी तहज़ीब: हिन्दू-मुस्लिम भाइयों ने मिलकर दी प्रवासी मजदूरों को ईदी, खिलाई सेंवई

जबलपुर।संदीप शर्मा

रमज़ान(ramzan) के पाक माह के अंतिम रोज़े पर मनाई जाने वाली ईद(eid) की चमक कोरोना(corona) काल मे ज़रा भी फीकी नही पड़ी। भले ही ईदगाहो पर ईद की नमाज़ अता न हो पाई हो लेकिन अल्लाह की इबादत का अनोखा तरीको अकीदतमंदो ने खोज निकाला। बेशक लाॅकडाउन(lockdown) का दौर चल रहा है। ऐसे मे कुछ हिन्दू(hindu) मुस्लिम(muslim) भाईयो ने मिलकर जबलपुर के एनएच7 पर गरीब ओर बेबस प्रवासी श्रमिको(migrant labourers) को लजीज सेंवई खिलाई और ईद की दिली मुबारकबाद दी।

गंगा जमुनी तहजीब का परिचय देते हुए हिन्दू-मुस्लिम भाईयो ने बकायदा मजदूरो को बैठाकर उन्हे सेंवई के मीठेपन के स्वाद को परोसा और अपनेपन का भी एहसास कराया। गौरतलब है कि लाॅकडाउन के दौर मे प्रवासी मजदूरो का अपने गनतव्य स्थान तक जाने का सिलसिला जारी है। नौतपा के इस तेज तपिश मे भी मजदूर बिना रूके मीलो का सफर तय कर रहा है। ऐसे मे इन जायरीनो ने इन गरीब तबके के लोगो का विशेष ध्यान रखते हुए रमज़ान के अंतिम रोज़े पर खुद को पीड़ित मानव्ता की सेवा मे समर्पित किया।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews