रॉन्ग साइड जा रहे युवक को ट्रैफ़िक पुलिस के ASI ने पीटा, वीडियो वायरल, सस्पेंड

रॉन्ग साइड जा रहे युवक को ट्रैफ़िक पुलिस के ASI ने पीटा, वीडियो वायरल, सस्पेंड

ग्वालियर, अतुल सक्सेना| शहर के शिंदे की छावनी चौराहे पर सोमवार को हंगामा हो गया। यहाँ तैनात ट्रैफ़िक ASI ने राँग साइड जा रहे बाइक सवार युवक को रोककर जमकर पिटाई लगाई। युवक की पिटाई का वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद एसपी ने ASI को सस्पेंड कर दिया है।

जानकारी के अनुसार आज सोमवार को शिंदे की छावनी चौराहे पर शान शौकत के पास ASI यू एस राजौरिया एक सिपाही के साथ ड्यूटी पर तैनात थे। तभी एक बाइक सवार युवक राँग साइड वहाँ से गुजर रहा था। जब पुलिस ने उसे रोका और चालान काटने के लिए कहा तो युवक ने बाइक सड़क पर खड़ी कर दी और चालान कटवाने से इंकार कर दिया। दोनों के बीच बहस होने लगी फिर थोड़ी ही देर में बहस विवाद में बदल गई। बताया जा रहा है कि बाइक सवार युवक ने अपना नाम आर्यन बताया और कहा कि उसके रिश्तेदार पुलिस में ही है। लेकिन थोड़ी देर में बात इतनी बिगड़ गई कि ट्रैफ़िक ASI अपना आपा खो बैठे और उन्होंने युवक को गालियाँ सुनाई और उसके साथ मारपीट कर दी थोड़ी ही देर में मारपीट का वीडियो वायरल हो गया। वायरल वीडियो पुलिस अधीक्षक अमित सांघी के पास भी पहुंचा जिसे बाद उन्होंने वीडियो के आधार पर ASI राजौरिया को निलंबित कर दिया। ASI के निलंबन की पुष्टि डी एस पी ट्रैफ़िक नरेश अन्नोटिया ने की है उन्होंने कहा कि पुलिस को बहुत धैर्य और अनुशासित रहने की आवश्यकता है। पुलिस कार्रवाई कर सकती है लेकिन उसे किसी को मारने का अधिकार नहीं हैं इसीलिए एसपी साहब ने ASI को निलंबित कर दिया है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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