सास ने अपनी कोरोना संदिग्ध बहु को कमरे में किया कैद, Video वायरल

सास ने अपनी कोरोना संदिग्ध बहु को कमरे में किया कैद, Video वायरल

जबलपुर।संदीप कुमार

कोरोना का ख़ौफ़ किस तरह से लोगो मे है ये तस्वीरें अब धीरे धीरे सामने आ रही है।संदिग्धों को लेकर लगातर लोगो मे भय और दहशत बना हुआ है फिर भले ही वह अपने क्यो न हो।जबलपुर में भी कोरोना संदिग्ध एक महिला और उसकी आठ साल की बच्ची को बीते दो दिन से एक कमरे में कैद रखा गया।कमरे में कैद कर रखने का आरोप महिला ने अपनी सास पर लगाया है।महिला ने कोरोना काल मे अपनी सास पर प्रताडित करने का भी आरोप लगाया।

महिला ने वीडियो बनाकर दिया अपने परिजन को

रामपुर आदर्श नगर में रहने वाली महिला ने अपनी सास पर कोरोना संदिग्ध होने के नाम पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।रामपुर इलाके में अपने घर के एक कमरे में अपनी आठ वर्ष की बेटी के साथ कोरन्टीन इस महिला ने बच्ची का वीडियो बनाकर अपने परिचितों को वीडियो भेजा है। वीडियो में महिला अपनी सास पर परेशान करने का आरोप लगा रही है। महिला के मुताबिक उसे और उसकी बच्ची को दो दिन से घर के एक छोटे कमरे में कैद कर रखा गया है।

घर के बाहर लगा है कोविड-19 का बोर्ड

आदर्श नगर में जिस घर मे महिला रहती है उनके घर मे कोरोना संदिग्ध याने कोविड -19 का पोस्टर चिपका हुआ है।बताया जा रहा है कि महिला दो तीन दिन पहले ही जबलपुर आई थी और उन्हें सर्दी होने के कारण होम क्वारेन्टीन किया गया है।

महिला का पति हाई कोर्ट में लीगल ऑफिसर

जानकारी के मुताबिक महिला का पति हाई कोर्ट में लीगल ऑफिसर है।महिला का अपने पति के साथ को लेकर कोर्ट में केश भी लगा हुआ है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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