MP Cabinet: किसान का बेटा अथक परिश्रम कर बना मंत्री, परिजन और समर्थकों में खुशी की लहर

MP Cabinet: किसान का बेटा अथक परिश्रम कर बना मंत्री, परिजन और समर्थकों में खुशी की लहर

भिण्ड।गणेश भारद्वाज

विद्यार्थी परिषद से की राजनीति की शुरुआत, सामान्य कृषक परिवार में जन्म लेने वाले अरविंद भदौरिया ने विद्यार्थी परिषद से अपनी राजनीति की शुरुआत की और फिर पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा अपने अथक परिश्रम और मेहनत के बलबूते पर एक छोटे से कार्यकर्ता से आज कैबिनेट मंत्री के पद तक पहुंचे है।

डॉक्टर अरविंद भदौरिया भिंड जिले की अटेर विधानसभा से दूसरी बार विधायक चुने गए हैं उन्होंने दो हजार अट्ठारह के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता हेमंत कटारे को 5 हजार से अधिक मतों से हराया था। इससे पहले 2008 में अटेर विधानसभा से पहली बार अरविंद भदौरिया भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में विधायक चुने गए थे इन्होंने पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वर्गीय सत्यदेव कटारे को हराया था

50 वर्षीय अरविंद भदौरिया मूलतः क्षेत्र के चंबल नदी के किनारे बसे ज्ञानपुरा गांव के निवासी है चंबल के बीहड़ में बसा हुआ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बसा यह गांव ही श्री भदौरिया की जन्मभूमि है। श्री भदौरिया के पिता शिवनाथ सिंह भदोरिया एक सामान्य कृषक थे। 2008 में भोपाल निवासी अर्चना शर्मा से श्री भदौरिया का विवाह हुआ और उनके एक पुत्र है जिसका नाम विराज है। बहुत ही सामान्य परिवार में जन्मे अरविंद भदौरिया ने संघ परिवार से जुड़ने के बाद विद्यार्थी परिषद के सदस्य के रूप में राजनीतिक शुरुआत की विद्यार्थी परिषद के अनेक पदों पर रहने के बाद 2008 में अटेर से पहली बार विधायक चुने गए इसके बाद अरविंद भदौरिया ने पीछे मुड़कर नहीं देखा मध्य प्रदेश भाजपा ने 5 बार मंत्री और एक बार उपाध्यक्ष पद पर रह चुके हैं इसके अलावा राष्ट्रीय किसान मोर्चा में भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। अरविंद भदौरिया ने कमलनाथ सरकार गिराने में अहम भूमिका का निर्वहन किया था। डॉ अरविंद भदौरिया की शैक्षणिक योग्यता m.a. के बाद में डॉक्टरेट की उपाधि है।

पहली बार विधायक बने तो कराया अटेर का रिकॉर्ड विकास

डॉ अरविंद भदौरिया जब पहली बार 2008 में अटेर विधानसभा से विजई हुए थे तो उन्होंने विधानसभा में हर क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर विकास कराने का काम किया था चाहे बिजली की समस्या हो और चाहे सड़कों की हर समस्या को मिटाने की दिशा में बढ़-चढ़कर काम किया और आखिर में लंबे समय बाद विकास दिखाई देने लगा था लेकिन दूसरा चुनाव वे स्वर्गीय नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे से हार गए और उसके बाद उपचुनाव में उनके बेटे हेमंत कटारे से केवल 800 वोटों के मामूली अंतर से हार गए एक बार आप मंत्री बनने से क्षेत्र के लोगों में उसी विकास की आस लगी है और अब लोग मान रहे हैं जो अटेर वर्षों से पिछड़ा हुआ था शायद उसकी अब तकदीर खुलने वाली है चाहे रुका हुआ कनेरा सिंचाई योजना का काम हो या फिर चंबल पर बनने वाला पुल इन सब कामों में अब जी भदोरिया के मंत्री बनने से गति आएगी ऐसा लोगों का मानना है।

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