MP News: 12वीं की छात्रा ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट छोड़ा, सदमें में परिवार

उमंग सिंघार

भोपाल/इंदौर।9 जून से एमपी बोर्ड (MP Board) की 12वीं की परीक्षाएं शुरु होने जा रही है, इससे पहले इंदौर (indore) से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। हाॅकी खिलाड़ी और 12वीं की एक छात्रा ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है।इतना ही नही छात्रा ने सुसाइड नोट (Suicide note) भी छोड़ा है और मां और छोटी बहन को उसकी मौत का जिम्मेदार ठहराया है।

मिली जानकारी के अनुसार, हाॅकी खिलाड़ी और 12वीं की एक छात्रा ने फांसी लगाकर जान दे दी।इसका खुलासा तब हुआ जब पिता सुबह 5.30 बजे उठे और दरवाजा खटखटाया लेकिन जब देर तक दरवाना नही खुला तो उन्होंने खिड़की से झांककर देखा तो पाया कि बेटी का शव फंदे पर झूल रहा था।बेटी के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है जिसमें छात्रा ने अपने पिता को संबोधित करते लिखा है कि मैं आपकी पत्नी और उनकी बेटी को पसंद नहीं थी। इस कारण यह कदम उठा रही हूं। जय श्री के परिवार में पिता ऑटो चलाते हैं। परिवार में मां बड़ी बहन और भाई भी है

टीआई अशोक पाटीदार के मुताबिक 19 वर्षीय जयश्री यादव पिता शंकर सिंह निवासी विजय श्रीनगर घर में फंदा लगाकर आत्महत्या की है। बुधवार रात छात्रा अपने कमरे में सोने चली गई थी। माता-पिता और दूसरे सदस्य दूसरे कमरे में सो रहे थे।गुरुवार सुबह 5:30 बजे पिता उठे उन्होंने कमरे का दरवाजा खटखटाया, लेकिन छात्रा ने दरवाजा नहीं खोला। संदेह के चलते मां और पिता ने किचन की खिड़की से कमरे में झांका तो बेटी को देख घबरा गए। दोनों उसे बचाने के लिए खिड़की से कमरे में उतरे।इसके बाद पिता ने अपने साले और पुलिस को डायल 100 पर घटना की सूचना दी। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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